भारतीय ओलंपिक संघ पर कसता शिकंजा

  • 17 अगस्त 2013
suresh kalmadi, सुरेश कलमाडी
सुरेश कलमाडी को राष्ट्रमंडल खेलों में घोटाले के बाद भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष पद से हटना पडा था.

भारतीय ओलंपिक संघ और अंतराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के बीच चल रहा विवाद एक बार फिर गर्मा गया है.

अब एक बार फिर अंतराष्ट्रीय ओलंपिक कमेटी यानी आईओसी ने पहल करते हुए भारतीय ओलंपिक संघ यानी आईओए को सुझाव दिया है कि वह अपने संविधान में संशोधन करे.

अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक कमेटी ने भारतीय ओलंपिक संघ को ये सलाह दी है कि वो इस बात का ध्यान रखे कि कोई भी व्यक्ति जो भ्रष्टाचार या अपराध से जुड़ा हो वो उसका सदस्य न बने.

अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक कमेटी के मुताबिक भारतीय ओलंपिक संघ का सदस्य बनने के लिए ज़रूरी होगा कि वह व्यक्ति भारत का नागरिक हो, उसके पास नागरिक अधिकार हों, किसी भी अदालत में उसके खिलाफ़ आरोप न तय किए गए हों और उसे किसी भी आपराधिक या भ्रष्टाचार के मामले में दोषी न पाया गया हो.

भारतीय ओलंपिक संघ चुनाव में धांधली के आरोप की वजह से अब भी निलंबित है.

सुरेश कलमाडी को राष्ट्रमंडल खेलों में घोटाले के कारण भारतीय ओलंपिक संघ के अघ्यक्ष पद से हटना पडा था और उनके बाद ललित भनोट को पिछले साल पांच दिसंबर को हुए चुनावों में महासचिव चुन लिया गया था.

ये चुनाव अंतराष्ट्रीय ओलंपिक कमेटी के भारतीय ओलंपिक संघ पर प्रतिबंध लगाने के एक दिन बाद हुए थे. इन चुनावों को भी बाद में अमान्य घोषित कर दिया गया.

"सुझाव सही नहीं"

जाने-माने खेल पत्रकार जी राजारमन अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक कमेटी के भ्रष्टाचार से जुड़े सुझावों को सही नहीं मानते लेकिन वो ये भी कहते हैं कि भारतीय ओलंपिक संघ के पास इन सुझावों को मानने के अलावा कोई चारा नहीं है.

राजारमन कहते हैं, "केवल अदालत में आरोप तय हो जाने की वजह से अगर किसी व्यक्ति को बाहर रखा जाएगा तो फिर सरकारी पदों पर मौजूद आधे से ज़्यादा लोग कहीं न कहीं परेशान हो जाएंगे और मुझे नहीं लगता कि ये सही है.

जी राजारमन का मानना है कि, "इसके बावजूद भारतीय ओलंपिक संघ के पास इसे मानने के अलावा कोई चारा नही है. ऐसे लोग जिन लोगों पर आपराधिक या भ्रष्टाचार के आरोप लगे है उनका चुनाव में भाग लेना मुश्किल हो जाएगा."

राजारमन ये भी कहते हैं कि अभी इस मामले में बहुत कुछ होना बाकी है. वे कहते हैं, "वैसे मुझे नही लगता कि संघ इन सारे सुझावों को मानेगा. अभी जो संविधान बनेगा उसमें काफी बदलाव होंगे और देखना है कि ये मीटिंग में क्या करते हैं. आखिरकार भारतीय ओलंपिक संघ एक स्वतंत्र संस्था है हालांकि उसे अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति से मान्यता लेनी होती है."

भारतीय ओलंपिक संघ की आम बैठक 25 अगस्त को होगी.

"विरोधाभास"

इसके अलावा अंतराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने भारतीय ओलंपिक संघ पर ये फैसला छोड़ दिया है कि वो अपने संविधान में पदाधिकारियों की उम्र और कार्यकाल की सीमा को निश्चित करना चाहता है या नहीं.

भारत के खेल मंत्रालय का कहना है कि खेल संघों के पदाधिकारियों को उम्र के दायरे में आना होगा और एक निश्चित अवधि तक ही वे अपने पदों पर रह सकेंगे.

इस पहलू को लेकर एक और जाने माने खेल-पत्रकार हरपाल सिंह बेदी कहते है, "ये एक विरोधाभास है. एक तरफ़ तो अंतराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने ख़ुद निर्धारित कर लिया कि जिनके खिलाफ आरोपपत्र हैं वह चुनाव न लड़ें. लेकिन उम्र और पद पर बने रहने की सीमा का फैसला भारतीय ओलंपिक संघ पर क्यों छोड़ा है"

हरपाल सिंह बेदी का कहना है, "क्या अब ये सरकार उनका फैसला मानेगी जिसने साफ़ कहा है कि 70 साल से ज़्यादा उम्र का आदमी किसी भी संघ में ना हो और न ही तीन बार से ज़्यादा कोई भी अधिकारी किसी भी पद पर रह सकता है."

वहीं भारतीय ओलंपिक संघ के कार्यकारी अध्यक्ष विजय कुमार मल्होत्रा उम्र और कार्यकाल से जु़ड़े सरकार के विधेयक को ग़लत मानते हैं.

वे कहते हैं, "ये विधेयक ग़लत है. दुनिया में कहीं भी ऐसा बिल नहीं लाया गया है. अगर सरकार इस विधेयक को वापस ले ले तो भारतीय ओलंपिक संघ पर लगा प्रतिबंध ख़त्म हो जाएगा और आईओए फिर से काम करने लग जाएगा लेकिन सरकार इस बात पर अड़ी हुई है."

विजय कुमार मल्होत्रा आगे कहते हैं, "एक तरफ़ भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह 80-81 साल के हैं या राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी 76 साल के है और दूसरी तरफ़ ये कह रहे हैं कि खेलों के अंदर सुशासन के लिए कोई 70 साल के बाद रह ही नहीं सकता. लेकिन बात सिर्फ़ खेलों पर लादना सही नहीं है."

अब हालत यह है कि अंतराष्ट्रीय ओलंपिक कमेटी ने गेंद भारतीय ओलंपिक संघ के पाले में डाल दी है जिसका जवाब उसे देना है. लेकिन ये जवाब क्या होगा ये कहना मुश्किल है.

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