क्रिकेट का भी सुपरपावर बनेगा चीन!

  • 6 अगस्त 2013
चीन, क्रिकेट

चीन में जब हमने एक पार्क में घूम रही लड़की को क्रिकेट का बल्ला दिखाकर पूछा कि क्या वो इस चीज को पहचान सकती है? लड़की ने कहा, “ये नाव का चप्पू है, है ना?”

पार्क में घूम रहे दूसरे लोग भी इस बल्ले को देखकर चकित थे. लेकिन कुछ लोग इसे पहचान भी रहे थे. एक लड़के ने बताया कि उसने अपने स्कूल में कुछ लोगों को क्रिकेट की कोचिंग लेते हुए देखा है.

हम अपना ये अवैज्ञानिक प्रयोग चीन के उत्तर-पूर्वी शहर शेनयांग में कर रहे थे. शेनयांग को चीन की “क्रिकेट राजधानी” कहा जाता है. इस बच्चे के जवाब से हमारे सामने इस बात की पुष्टि भी हो गई.

चीन के महिला और पुरुष दोनों वर्गों में शेनयांग में स्थित खेल विश्वविद्यालयों की ही टीमें राष्ट्रीय चैंपियन हैं.

जब हम चीन के चैंपियन क्रिकेट खिलाड़ियों से मिलने गए तो देखा कि वो एस्ट्रोटर्फ पर अभ्यास कर रहे हैं.

कुछ निजी क्लबों और अंतरराष्ट्रीय स्कूलों को छोड़ दिया जाए तो पूरे चीन में घास का सिर्फ एक क्रिकेट मैदान है. और यह मैदान भी सुदूर दक्षिणी शहर ग्वांज़ो में है. यह मैदान 2010 के एशियाई खेलों के लिए बनाया गया था.

महिलाएँ हैं आगे

चीन के खिलाड़ियों में उत्साह और लगन की कमी नहीं है. खेल विश्वविद्यालय की महिला टीम काफी सुसंगठित नज़र आ रही थी. उनकी फील्डिंग भी अच्छी थी. उनकी विकेट-कीपर ने मुझे ख़ास तौर पर प्रभावित किया.

यह विकेट-कीपर चीन की राष्ट्रीय टीम के लिए भी खेलती हैं. चीन की महिला टीम मात्र सात सालों में एशियाई महिला क्रिकेट के दूसरे स्तर में करीब-करीब शीर्ष पर पहुँच गई है.

मुझे चीन के पुरुष क्रिकेट खिलाड़ियों को देखना का भी अवसर मिला. सुन ली नामक एक खिलाड़ी को मैंने एक ऐसा कैच लेते देखा जिसे लेकर कोई भी टेस्ट-क्रिकेटर गर्व महसूस करेगा.

सुन ली ने सीमा-रेखा की तरफ दौड़ते हुए काफी ऊँचा कैच लपका था. हालाँकि चीन के पुरुष क्रिकेट महिला क्रिकेट से पीछे है.

शुयाओ नामक एक और पुरुष खिलाड़ी से हमने पूछा कि उन्हें क्रिकेट में क्या अच्छा लगता है. शुयाओ का कहना था, “यह खेल परिवार में रहने के समान है.”

शुयाओ अमीर परिवार से नहीं आते. वो कई बार अपने जेबख़र्च के लिए मोजे भी बेचते हैं. हालाँकि उन्होंने 2012 की गर्मियों में इतने पैसे बचा लिए थे कि वो इंग्लैंड में क्लीथ्रोप क्रिकेट क्लब में जाकर खेल सकें. इंग्लैंड क्लब क्रिकेट में उनका अधिकतम स्कोर 98 रहा था.

मुश्किल है विकास

अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ और क्रिकेट के स्थानीय प्रशंसक चीन में क्रिकेट का विकास करना चाहते हैं. लेकिन उनके सामने कई मुश्किलें भी हैं.

चीन में क्रिकेट की कोई परंपरा नहीं है. साजो-सामान की भी कमी है और शहरों में शॉपिंग मॉल और गगनचुंबी रिहायशी इमारतों के बनने से शहरों में बड़े मैदानों के लिए जगह कम पड़ती जा रही है.

मुझसे कई लोगों ने कहा कि चीनी टीम गेम में ज़्यादा रुचि नहीं लेते. प्राइमरी स्कूलों में बच्चे क्रिकेट खेलते हैं लेकिन पढ़ाई-लिखाई और अभिभावकों के दबाव के कारण वो भविष्य में इसे जारी नहीं रख पाते.

स्कूल के बाद सीधे विश्वविद्यालय में उन्हें क्रिकेट खेलने की फुरसत मिल पाती है.

सरकार की इच्छा

चीन में खेलों का भविष्य सरकार की नीतियों पर निर्भर होता है. चीन के कुछ प्राइमरी स्कूलों में क्रिकेट को एक वैकल्पिक खेल के रूप में शामिल किया गया है.

इसका क्या फायदा होगा, पता नहीं लेकिन चीन की जनसंख्या को देखते हुए कहा जा सकता है कि अगर चीन में क्रिकेट लोकप्रिय हुआ तो चीन के पास लाखों की संख्या में क्रिकेट खिलाड़ी होंगे.

चीन में क्रिकेट का भविष्य बहुत हद तक इस बात पर भी निर्भर है कि क्रिकेट को ओलंपिक में शामिल किया जाता है या नहीं.

चीन के खेल मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार यदि क्रिकेट को ओलंपिक में शामिल किया जाता है तो मंत्रालय पदक लाने के लिए पूरी ताकत लगा देगा.

फिर दूसरे खेलों की तरह क्रिकेट के लिए भी कम उम्र में ही संभावना वावे क्रिकेटर के रूप में लड़के-लड़कियों का चयन किया जाने लगेगा.

दुनिया के बेहतरीन कोचों को बुलाया जाने लगेगा. चीन की राष्ट्रीय टीम की वर्ल्ड रैंकिंग रातों-रात बढ़ जाएगी.

बहरहाल, ओलंपिक में केवल टी-20 क्रिकेट के ही शामिल होने की संभावना है.

खेल मंत्रालय के अधिकार से जब हमने पूछा कि क्या उन्होंने कभी टेस्ट क्रिकेट देखा है तो वो बोले, “नहीं, नहीं, टेस्ट क्रिकेट देखना तो एक त्रासदी होगी.”

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