क्रिकेट को चाहिए पेरी का ग्लैमर....

  • 19 फरवरी 2013
एलीस पेरी

ऐसा कम ही होता है कि एक राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी क्रिकेट में अपना बल्ला चमकाए, गिल्ली भी उखाड़े और फिर अपने देश के लिए वैसा ही कमाल फुटबॉल के मैदान पर भी दिखाए.

इतना ही नहीं खेल से फुर्सत मिले तो रेडियो और टीवी पर शो प्रस्तुत करे और साथ में अर्थशास्त्र और समाजशास्त्र की पढ़ाई भी करे.

मिलिए ऑस्ट्रेलिया की तेज़ गेंदबाज़ एलीस पेरी से. ऑस्ट्रेलिया ने वेस्ट इंडीज़ को हराकर छठी बार महिला क्रिकेट विश्व कप जीता तो पूरे टूर्नामेंट में पेरी का ही बोलबाला रहा.

फाइनल में उन्होंने 10 ओवर्स में सिर्फ 19 रन देकर तीन विकेट झटके और तेज़ तर्रार 22 रन भी बनाए.

बीबीसी से खास बात करते हुए पेरी ने कहा, "मैं अपने आपको खुशकिस्मत मानती हूं कि क्रिकेट और फुटबॉल दोनों ने ही मुझे कबूल किया और मैं अपनी खास जगह बनाने में कामयाब रही. मैं ज़्यादा सोचती नहीं हूं. सिर्फ वक्त के साथ बढ़ती चली जा रही हूं."

'ब्रांड पेरी' की ज़रूरत

वैसे ऑस्ट्रेलियाई खेल जगत का मानना है कि दोनों ही खेलों को पेरी जैसे सितारों की सख्त ज़रूरत है.

पूर्व ऑस्ट्रेलिया बल्लेबाज़ मेल जोन्स कहती हैं, "पेरी खूबसूरत हैं. तेज तर्रार हैं. और काफी टैलेंटेड हैं. दोनों ही खेलों उनके ग्लैमर की यानी ब्रांड पेरी की ज़रूरत है. उनकी वजह से लोग महिला क्रिकेट और फुटबॉल की बातें कर रही हैं."

खुद पेरी को 'ब्रांड पेरी' होने की ज़िम्मेदारी का अहसास है.

वो कहती हैं, "मैं अपने देश में लड़कियों को खेलने के साथ-साथ हेल्दी लाइफ स्टाइल के लिए भी प्रेरित करना चाहती हूं. इससे उन्हें महिला के तौर पर सम्मान पाने और अपने आपके लिए अच्छा महसूस करने में मदद मिलेगी."

पेरी अपने पढ़ाई करने के फैसले के पीछे की वजह बताते हुए कहती हैं, "जब मैं बूढ़ी हो जाऊंगी और दौड़ नहीं पाऊंगी तो यही पढ़ाई मेरा सहारा बनेगी."

सबसे कम उम्र की क्रिकेटर

लंबे कद की 22 वर्षीय पेरी महिला क्रिकेट में सनसनी के तौर पर उभरी हैं. ऑस्ट्रेलिया में महिला क्रिकेट को लोकप्रिय बनाने में उनका ज़बरदस्त योगदान माना जा रहा है.

पेरी ने सिर्फ 16 साल की उम्र में ऑस्ट्रेलिया के लिए बतौर क्रिकेटर अपना करियर शुरू किया. वो ऐसा करने वाली सबसे कम उम्र की क्रिकेटर (पुरुष और महिला) बन गईं.

इसके एक महीने बाद ही वो ऑस्ट्रेलिया की फुटबॉल टीम में जगह बनाने में भी सफल हो गईं.

पेरी ने 2011 के विश्व कप फुटबॉल में भी ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व किया और टीम को क्वार्टर फाइनल तक पहुंचाने में महत्तवपूर्ण भूमिका निभाई.

लेकिन फिर भी उन्हें ज़्यादा कामयाबी क्रिकेट में ही मिली. उनका ऐक्शन गेंदबाज़ी में उन्हें स्वाभाविक गति देता है.

वो ऐशेज जीतने वाली और दो बार विश्व कप टी 20 जीत चुकी ऑस्ट्रेलिया टीम का हिस्सा रह चुकी हैं.

पेरी, पूरी दुनिया में ना सिर्फ क्रिकेट और फुटबॉल बल्कि दूसरे खेलों में भी महिलाओं के बढ़ते प्रतिनिधित्व से खासी उत्साहित हैं.

वो कहती हैं, "महिला खेलों में दिन-ब-दिन लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है. इसमें ज़्यादा से ज़्यादा प्रोफेशनलिज़्म आता जा रहा है."

रोल मॉडल

ऑस्ट्रेलिया की कई युवा क्रिकेटर पेरी को अपना आदर्श मानती हैं. उनमें से एक हैं 17 वर्षीय हॉली फर्लिंग.

इस विश्व कप में इंग्लैंड के खिलाफ मैच से ठीक पहले जब पेरी घायल हो गई थीं तो फर्लिंग को खेलने का मौका मिला था.

उन्होंने निराश नहीं किया और 35 रन देकर तीन विकेट लिए थे.

लंबे कद की, तेज़ रफ्तार से गेंद डालने वाली फर्लिंग, पेरी से इतनी ज़्यादा मिलती जुलती हैं कि लोग उन्हें पेरी का क्लोन भी कहते हैं.

फर्लिंग कहती हैं, "पेरी मेरी रोल मॉडल हैं. उन्होंने जो हासिल किया है मुझे नहीं लगता कि कोई उसकी बराबरी भी कर पाएगा."

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