इंग्लैंड ने उजागर कीं भारत की कमज़ोरियां

 सोमवार, 3 दिसंबर, 2012 को 07:30 IST तक के समाचार
मोंटी पनेसर

मोंटी पनेसर भारतीय टीम पर भारी पड़े हैं.

इंग्लैंड के खिलाफ पहले टेस्ट मैच में स्पिनर्स की भूमिका ज़ाहिर होने के बाद कई लोगों को महसूस हुआ कि भारतीय टीम के लिए ये अपनी क्षमता दिखाने से अधिक अपनी कमजोरी छिपाने वाली बात थी.

अहमदाबाद के बाद मुंबई की बारी आई और केविन पीटरसन ने कप्तान एलिस्टर कुक के साथ धोनी और उनके टर्निंग ट्रैक की धज्जियां उड़ा दीं.

दुनिया की अधिकतर ज़ुबानों में ये जुमला मिल जाएगा कि दूसरों के लिए खोदे गए गढ्ढे में वही व्यक्ति गिरता है जिसने गढ्ढा खोदा था.

भारतीय टीम के साथ भी यही हुआ. ग्रैम स्वान और मोंटी पनेसर ने अपनी धारदार गेंदबाजी से भारतीय टीम को धूल चटा दी.

भारतीय गेंदबाजों ने भी गेंदबाजी की हर तरकीब आजमाने की कोशिश की.

भारतीय टीम में अंदरूनी घमासान भी था. हरभजन सिंह ने वापसी की थी और अश्विन उन्हें चुनौती दे रहे थी. नतीजा ये हुआ कि दोनों ही दबाव में थे, प्रदर्शन पर तो असर पड़ना ही था.

कोच डंकन फ्लेचर और गेंदबाजी सिखाने वाले जॉन ड्वेस की भूमिका की पड़ताल करना भी कम रोचक नहीं होगा.

सलाह लेने की जरूरत

क्या विडम्बना है, जिम्बाव्बे का बल्लेबाज और ऑस्ट्रेलिया का गेंदबाज, भारतीय टीम को बता रहे हैं कि घरेलू पिचों पर कैसे गेंद फेंकना है.

धोनी टर्निंग ट्रेक की मांग करते रहे जबकि इससे मदद मेहमान टीम को मिलती रही है.

महेंद्र सिंह धोनी

महेंद्र सिंह धोनी टर्निंग ट्रेक की मांग करते रहे.

डेरेक अंडरवुड के 29 विकेटों की मदद से इंग्लैंड ने वर्ष 1976-77 के दौरान भारत में भारत के खिलाफ तीन टेस्ट मैचों की श्रृंखला जीती थी.

भारत के पास तब बिशन बेदी, भागवत चंद्रशेखर, इरापल्ली प्रसन्ना और श्रीनिवास वेंकटराघवन जैसे धुरंधर थे और टीम बस एक मैच बैंगलोर में जीत पाई थी.

बैंगलोर में ही मनिंदर सिंह ने पाकिस्तान के सात विकेट चटकाए थे जहां उसकी पूरी टीम 116 रन पर सिमट गई थी. फिर भी पाकिस्तान की टीम अपने स्पिनर तौसीफ अहमद और इकबाल कासिम के बूते जीत गई थी.

वैसे मुंबई टेस्ट भारत आसानी से जीत जाता यदि टीम में अनिल कुंबले होते क्योंकि ऐसा लग रहा था कि विकेट उनके हिसाब से बनाया गया है.

क्या भारतीय स्पिनर बेदी और कुंबले से सलाह-मशविरा करेंगे जो आसानी से उपलब्ध हैं. भारतीय स्पिनरों को मुंबई में इसलिए पसीना छूटा क्योंकि टीम अपनी पूरी ताकत और अनुभव का इस्तेमाल नहीं कर रही थी.

इंग्लैंड की जीत ने इस श्रृंखला को रोचक बना दिया है. साथ ही भारतीय टीम की कमजोरी पर रौशनी डाली है.

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