गर्भवती अगर मोटी तो बच्चा बन सकता है दिल का रोगी

  • 17 अगस्त 2013

एक अध्ययन से पता चला है कि ज़्यादा वज़न वाली और मोटी माओं से पैदा होने वाले बच्चों के दिल की बीमारी से जल्दी मौत होने की संभावना ज़्यादा होती है.

स्कॉटलैंड में हुए शोध से पता चला है कि गर्भावस्था के दौरान जो महिलाएं मोटी होती हैं उनके बच्चों की 55 साल से कम उम्र में मृत्यु की संभावना 35 फ़ीसदी ज़्यादा होती है.

हालांकि अभी इस शोध से ये पता नहीं चला है कि इन नतीजों के लिए जेनेटिक्स, गर्भाशय पर पड़ने वाले प्रभाव और बाद की जीवन शैली कितनी ज़िम्मेदार है.

लेकिन ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित इस शोध के लेखकों का कहना है कि उनके निष्कर्ष जनस्वास्थ्य के लिए चिंता विषय हो सकते हैं.

ब्रिटेन में प्रसव से पूर्व हर पांच में से एक महिला ज़रूरत से ज़्यादा मोटी हो जाती है.

समय पूर्व मृत्यु

इस शोध में 28,540 वैसी महिलाओं पर अध्ययन किया गया जिनका गर्भधारण के बाद पहली बार परीक्षण किया गया. ऐसी महिलाओं के 37,709 बच्चों का भी विश्लेषण किया गया जिनकी उम्र 34 से 61 साल के बीच है.

Image caption मोटी महिलाओं के बच्चों को दिल की बीमारी होने की संभावना ज़्यादा रहती है.

इस अध्ययन में हर पांच में से एक महिला को ज़्यादा वज़न का माना गया जिनका बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 25 से 29.9 के बीच था जबकि चार फीसदी महिलाएं 30 से ज़्यादा बीएमआई के साथ और ज़्यादा मोटी पाई गईं.

इस शोध के निष्कर्षों तक पहुंचने में दिल की बीमारी या किसी अन्य कारण से हुई समय पूर्व 6,551 मौतों को शामिल किया गया.

शोध में पाया गया कि गर्भावस्था के दौरान जिन महिलाओं का वज़न सामान्य था उनके मुकाबले ज़्यादा वज़न वाली माओं के बच्चों की समयपूर्व मृत्यु की संभावना 35 फ़ीसदी ज्यादा पाई गई.

इस अध्ययन में प्रसव के समय माता की आयु, बच्चे का वज़न और सामाजिक स्थिति को भी शामिल किया गया था.

भोजन पर नियंत्रण

इस शोध का नेतृत्व करनेवाली एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी की प्रोफ़ेसर रेबेका रेनॉल्ड्स ने कहा कि शोध के नतीजे ये इस ओर इशारा करते हैं कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को वज़न पर नियंत्रण रखना चाहिए, सोच समझकर खाना चाहिए और सक्रिय जीवन बिताना चाहिए.

हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि गर्भावस्था के दौरान ज़्यादा वज़न और बच्चों की जल्दी मृत्यु के बीच पूरी तरह किसी निर्णायक निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए अभी और शोध की ज़रूरत है.

पहले के शोधों से ये पता चला है कि गर्भावस्था के दौरान ज़्यादा वज़न का बच्चे के भूख की प्रकृति और उसकी काया से संबंध होता है.

Image caption शोधकर्ता मोटी महिलाओं को वज़न कम करने की सलाह देते हैं.

कैंब्रिज विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर सर स्टीफ़ेन ओ’रहिली ने चेतावनी देते हुए कहा है कि मां के मोटापे का असर परिवार पर होता है.

“मोटे लोगों को दिल की बीमारी की संभावना ज़्यादा होती है, इसलिए इस शोध में शामिल लोग उन लोगों के मुकाबले ज्यादा मोटे थे जिनकी माएं दुबली-पतली थीं.”

'अच्छा खाएं'

‘रॉयल कॉलेज ऑफ़ मिडवाइव्स’ का कहना है कि महिलाओं को सामान्य वज़न में गर्भधारण करना चाहिए.

लेकिन कॉलेज के डायरेक्टर लुई सिल्वरटोन का कहना है कि हर प्रीग्नेंसी योजनाबद्ध नहीं होती और मिडवाइव्स यानी प्रसव में मदद करनेवाली महिलाएं पूरी कोशिश करती हैं कि गर्भवती महिलाएं वज़न न बढ़ाएं और प्रसव के बाद सही तरीके से वज़न कम करें.

इस शोध को थोड़ी आर्थिक सहायता देनेवाली संस्था ब्रिटिश हार्ट फ़ाउंटेशन में सीनियर कार्डियक नर्स डोइरेन मैड्डॉक का कहना है, “ये अध्ययन सभी लोगों को सतर्क करता है लेकिन खासतौर से इसका महत्व गर्भवती महिलाओं के लिए है जिन्हें अच्छा भोजन लेना चाहिए और सक्रिय रहना चाहिए.”

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