टचस्क्रीन: गंदी नहीं होगी, बीमार नहीं करेगी

  • 17 अगस्त 2013
टचस्क्रीन कंप्यूटर

टचस्क्रीन फ़ोन और टैबलेट अब हर वर्ग और हर श्रेणी में लोकप्रिय हो गए हैं.

लेकिन एक दिक्कत सभी तरह की टचस्क्रीन के साथ आती है और वह है स्क्रीन पर पड़ने वाले निशान.

यह निशान न सिर्फ़ स्क्रीन को गंदा करते हैं बल्कि यह कई तरह के इंफ़ेक्शन भी फैला सकते हैं.

इसलिए दुनिया भर में वैज्ञानिक ऐसी तकनीकों पर काम कर रहे हैं जिससे टचस्क्रीन साफ़ और सुरक्षित बन सके. जैसे कि खुद ही जीवाणुओं को मार सकने में सक्षम कोटिंग.

ब्लीच

इलेक्ट्रॉनिक वैज्ञानिक स्टीव ब्लॉक डाऊ कॉर्निंग कंपनी में काम करते हैं. ये कंपनी टच स्क्रीन पर लगाने वाली परत बनाती है.

स्टीव ब्लॉक कहते हैं, “ऐसी बहुत सी चीज़ें हैं जो हमारी स्क्रीन को गंदा कर सकती हैं. पहले तो वह तेल होता है जो हाथ से निकलता है, फिर लोशन, सौंदर्य प्रसाधन होते हैं और पसीना भी लगता है जो फ़ोन को कान से सटाने पर लग जाता है.”

एरिज़ोना विश्वविद्यालय में माइक्रोबायोलॉजिस्ट प्रोफ़ेसर चार्ल्स गेर्बा कहते हैं कि अगर फ़ोन सिर्फ़ आप ही इस्तेमाल करते हैं तो चिंता की कोई बात नहीं.

उन्होंने बीबीसी से कहा, “टचस्क्रीन पर बहुत से जीवाणु होते हैं. लेकिन अगर बहुत से लोग इसे इस्तेमाल नहीं करते तो कोई फ़र्क नहीं पड़ता क्योंकि ये आपके जीवाणु हैं.”

लेकिन दिक्कत तब होती है जब इन टचस्क्रीन को सार्वजनिक स्थानों पर रखा जाता है. जैसे कि ऐसे सुपरमार्केट में जहां खुद का सामान चुनते हैं, डॉक्टर के वेटिंग रूम में या ऐसे परिवारों में जहां गैजेट को कई लोग इस्तेमाल करते हैं.

Image caption टचस्क्रीन पर निशान सिर्फ़ देखने में दिक्कत नहीं करते संक्रमित भी कर सकते हैं

प्रोफ़ेसर गेर्बा और उनके सहयोगियों के एक अध्ययन में देखा गया कि कई लोगों के इस्तेमाल करने पर संक्रमण कितना ख़तरनाक हो सकता है.

वह कहते हैं, “एक ही सेलफ़ोन इस्तेमाल करने वाले किशोरों में हमें एमआरएसए संक्रमण मिला है. अमरीका में खुद सामान चुनने वाली दुकानों पर रखी टचस्क्रीन पर भी आपको एमआरएसए मिलता है.”

एक लघु अध्ययन में डॉ. गेर्बा ने पाया कि संक्रमण से बचने के लिए टचस्क्रीन को साफ़ रखकर जीवाणुओं को ख़त्म कर देना चाहिए.

सोडियम हाइपोक्लोराइट (ब्लीच) स्क्रीन को साफ़ करने का बेहतर उपाय है.

हालांकि नियमित रूप से ब्लीच करना महंगे और चमकदार टचस्क्रीन उपकरण के हक में नहीं होगा.

लेकिन दूसरे उपाय भी हैं.

मांसाहारी पौधे से प्रेरणा

ब्लॉक कहते हैं कि स्क्रीन बनाने वाले लगातार पदार्थ और परत को बेहतर बना रहे हैं ताकि उपकरण को साफ़ करना आसान हो जाए.

इसमें लगने वाले शीशे और उस पर लगने वाली परत को सबसे सूक्ष्म स्तर पर बनाया जा रहा है.

ब्लॉक कहते हैं, “इन्हें ख़ास तौर पर तैयार कणों से बनाया जा रहा है, जो इसी तरह के प्रयोग के लिए बनाए गए हैं.”

अब सामान्यतः टचस्क्रीन पर लगने वाली सिलिकॉन परत निशानों और पदार्थों को काफ़ी हद तक दूर रखती है.

Image caption सार्वजनिक स्थानों पर लगी टचस्क्रीन से संक्रमण का ख़तरा ज़्यादा होता है

इसके साथ ही ये ज़्यादा मजबूत हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि स्क्रीन सालों-साल सही रहे.

इसके अलावा सामान बनाने वाली जापानी कंपनी टोरे ने एक ऐसी परत बनाई है जो तेल और उंगलियों पर लगे अन्य पदार्थों को 50 फ़ीसदी तक हटा देती है.

एक बार लगाए जाने के बाद यह परत लाखों सूक्ष्म धारियों के रूप में सूख जाती है. जिससे यह गंदगी को छुपा लेती है और स्क्रीन चमकदार बनी रहती है.

ज़्यादातर टचस्क्रीन उपकरणों में इस्तेमाल होने वाले गोरिल्ला ग्लास के चौथे संस्करण में एक जीवाणु विरोधी परत लगी होगी जो जीवाणुओं को खुद ही ख़त्म कर देगी. इसका अगले कुछ सालों में इस्तेमाल शुरू होगा.

हॉर्वर्ड विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ़ इंजीनियरिंग और एप्लाएड साइंसेस के वैज्ञानिकों ने भी इस दिशा में काम किया है.

उन्होंने एक मांसाहारी पौधे की तकनीक को अपनी स्क्रीन की परत बनाने में इस्तेमाल किया.

उन्होंने देखा कि पिचर पौधे की सतह बहुत चिकनी होती है क्योंकि इसमें सूक्ष्म गांठें होती हैं जिनमें पानी रुक जाता है. ऐसे कीड़े जो आसानी से सतह पर चल सकते हैं उन्हें इसमें टिकने में मुश्किल होती है क्योंकि यह बेहद चिकना होता है.

इस सतह की नकल कर और चिकनाई की एक बेहद पतली परत लगाकर उन्होंने एक ऐसी सतह तैयार की है जो शरीर में मिलने वाले पदार्थों के ठीक विपरीत है.

अभी इस पर शोध जारी है लेकिन यह साफ़ है कि इस स्क्रीन को गंदा करना मुश्किल होगा और इस्तेमाल करना आसान.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार