शिव के नाम पर निकले काँवड़िए

5 अगस्त 2013 अतिम अपडेट 16:40 IST पर

तेज़ धमाकेदार डीजे की फ़िल्मी धुनों पर काँवड़ियों की यात्रा कई तरह के रंगों से भरी है. पेश हैं कैमरे की नज़र से इनके कुछ रंग...
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सावन आते ही एक महीने के लिए भारत के कई हिस्से शिवमय हो जाते हैं. एक युवा दंपत्ति शिव को खुश करने के लिए गंगाजल ले जाते हुए. (सभी फ़ोटो जर्नलिस्ट रवि शंकर कुमार के कैमरे से)
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सफर लंबा हो तो मोटर साइकिल से कैसा परहेज़. मकसद है गंगाजल शिव जी को अर्पित करना
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काँवड़ियों के उत्साह के कारण कुछ काँवड़ों का आकार इतना बड़ा हो जाता है कि उसे उठाने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ती है.
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लंबा रास्ता तय करने के लिए ताज़गी ज़रुरी है.शिव की जटाओं से निकली गंगा में डुबकी.
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शिव की नगरी जाने के लिए नन्हे कदमों की ऊँची उड़ान.
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बड़े ही नहीं, बच्चों में भी है अद्भुत उत्साह.परिवार के साथ ये नन्ही बच्ची भी काँवड़िया बन गई.
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आजकल बाज़ार में बम भोले छाप टी-शर्ट की भरमार है. हर साल इनकी बिक्री होती है और ये धंधा भी बढ़ रहा है.
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काँवड़ियों के यात्रा मार्ग पर उनकी हर ज़रुरत के सामान के लिए दुकानें सजी हुईं हैं.
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डाक बम का दस्ता जो बिना रुके दौड़ते हुए यात्रा पूरी करता है.ये रिले रेस की तरह गंगा जल आगे पहुंचाते हैं.
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शिव के दर्शनों के लिए पैरों में छाले पड़ गए तो क्या? रास्ते में पड़ने वाले शिविरों में घायल पैरों की मरहम पट्टी की पूरी व्यवस्था रहती है.
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शिव भक्तों का अनूठा अंदाज़. फ़ैशन के साथ भक्ति.
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इस भक्त को देखकर शिव विवाह में गए बारातियों की याद आ जाए तो क्या आश्चर्य.
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धुएँ के छल्लों में भोले की भक्ति का नशा. थकने पर अगर कश लगा लिया जाए तो..
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भोले की भक्ति में परेशानियाँ खो जाती है, थकान के चलते आँखे भी डूबने सी लगती हैं.
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डीजे की धुनों पर थिरकते शिव भक्त. ये गाने फ़िल्मी धुनों पर बनाए जाते हैं.
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रात में विश्राम के दौरान शिव भक्तों के लिए राधा -कृष्ण की लीलाओं का मंचन.
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शिव की यात्रा में हॉकी की छड़ी का क्या काम. इसे साथ ले जाने वाले कहते हैं कि रास्ता तय करने में इससे सहारा मिलता है.