सीरिया पर हमला संसद की अनुमति के बाद: ओबामा

  • 1 सितंबर 2013
Image caption ओबामा ने संसद से सैन्य कार्रवाई का समर्थन करने की अपील की है

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने घोषणा की है कि सीरियाई हमलों के खिलाफ़ अमरीका को सैन्य कार्रवाई करनी चाहिए.

व्हाइट हाउस में बोलते हुए उन्होंने कहा कि ये कार्रवाई सीमित समय के लिए और मजबूत तरीके से होगी ताकि भविष्य में रासायनिक हमलों को रोका जा सके.

उन्होंने कहा कि ये कार्रवाई कल भी हो सकती है, अगले हफ़्ते भी हो सकती है या फिर निकट भविष्य में कभी भी. लेकिन उनका कहना था कि इसके लिए वो संसद की स्वीकृति लेना चाहेंगे.

ओबामा ने अमरीकी कांग्रेस से औपचारिक तौर पर सीरिया में सैन्य कार्रवाई की अनुमति मांगी है.

इस विधेयक के मसौदे में कहा गया है कि सीरिया सरकार को रासायनिक हमले करने से रोकने के लिए बल प्रयोग की स्वीकृति चाहिए. ओबामा ने अपनी इस अनपेक्षित फ़ैसले के बारे में शनिवार को घोषणा की थी.

उन्होंने सीरियाई सरकार पर एक बार फिर आरोप लगाया कि उसने दमिश्क के बाहरी इलाके में जहरीले रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया. उन्होंने इस हमले को मानव प्रतिष्ठा और अमरीकी की राष्ट्रीय सुरक्षा पर हमला बताया.

हमले के लिए तैयार

लेकिन सरकार विरोधी आंदोलन का समर्थन कर रहे दमिश्क स्थित सेंटर फॉर स्ट्रेटजिक स्टडीज के बासम अबू अब्दुल्ला का कहना था कि ओबामा को अभी भी शेष दुनिया को भरोसे में लेना होगा.

उन्होंने कहा, "यदि वो आश्वस्त हैं और कहते हैं कि ये 21 वीं सदी का सबसे बड़ा अपराध है तो ठीक है. ये सिर्फ ओबामा या फिर उनकी खुफिया एजेंसियों का निर्णय नहीं होना चाहिए बल्कि आम लोगों का निर्णय होना चाहिए. ये मुद्दा हम सीरियाई, ब्रिटिश और अमरीकी सभी लोगों के लिए महत्वपूर्ण है."

वहीं सीरियाई सरकार का कहना है कि उनकी सेना पूरी तरह चौकस है और किसी भी बाहरी हमले का सामना करने को तैयार है. सीरिया के सरकारी टेलीविजन पर प्रधानमंत्री वाएल अल हाल्की को ये कहते हुए दिखाया गया कि सेनाएं तैनात हैं और किसी भी चुनौती का सामना करने को तैयार हैं.

इस बीच दमिश्क के पास पिछले दिनों रासायनिक हमले से जुड़े आरोपों की जांच कर रहे संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों ने सीरिया छोड़ दिया है.

सीरिया में सैन्य कार्रवाई की बढ़ती संभावनाओं के बीच संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों की जांच को बेहद अहम माना जा रहा है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि सीरिया से संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों के चले जाने के बाद वहां अमरीकी नेतृत्व में सैन्य कार्रवाई के लिए अब राजनीतिक और व्यवहारिक अड़चनें दूर हो गई हैं.

रूस ने मांगा हमलों का सुबूत

रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने अमरीका से कहा है कि वो संयुक्त राष्ट्र के सामने इस बात के सबूत पेश करे कि रसायनिक हमले के लिए सीरियाई सरकार ही ज़िम्मेदार है.

पुतिन ने कहा कि रासायनिक हमले करके पूरी दुनिया को भड़काने का कदम उठाना सीरिया की सरकार के लिए बड़ी बेवकूफ़ी होता, वो भी तब जब सीरियाई सेना विरोधियों को ख़िलाफ़ बढ़त हासिल कर रही थी.

पत्रकारों से बातचीत में पुतिन ने कहा, "अमरीका दावा करता है कि सीरिया की सरकार ने रसायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया है और उनके पास सबूत हैं. उन्हें ये सबूत संयुक्त राष्ट्र के हथियार निरीक्षकों और सुरक्षा परिषद के समक्ष पेश करने चाहिए."

उन्होंने कहा, "सबूतों को ख़ुफ़िया बताकर पेश न करना अंतरराष्ट्रीय गतिविधी में शामिल सहयोगियों के प्रति असम्मान हैं. अगर उनके पास सबूत हैं तो वे पेश किए जाने चाहिए. यदि ये सबूत सामने नहीं आते हैं तो हम यही मानेंगे कि कोई सबूत है ही नहीं."

राष्ट्रपति पुतिन का ये बयान संयुक्त राष्ट्र के हथियार निरीक्षकों के दल के सीरिया छोड़ने के बाद आया है.

गौरतलब है राजधानी दमिश्क के नज़दीक हुए रसायनिक हमले में बच्चों समैत सैंकड़ों लोग मारे गए थे. अमरीका का मानना है कि इस रासायनिक हमले के पीछे सीरिया की सरकार है.

दमिश्क से आ रही रिपोर्टों के मुताबिक सीरिया की सेना अपने हथियारों की स्थिति में बदलाव कर रही है. हमले की संभावना के मद्देनज़र हथियारों को रिहायशी इलाक़ों में ले जाया जा रहा है. रिपोर्टों के मुताबिक मस्जिदों और स्कूलों में भी हथियार रखे जा रहे हैं.

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