मिस्र के जनरल अल-सीसी: चेहरे के पीछे असली चेहरा

  • 28 अगस्त 2013
अब्दुल अल-सीसी

मिस्र में मुस्लिम ब्रदरहुड समर्थकों में मिस्र के रक्षा मंत्री और सेना प्रमुख जनरल अब्दल फतेह अल-सीसी के लिए कड़वाहट बढ़ गई है क्योंकि वो उन्हें अपने में से एक समझते थे.

जनरल अल-सीसी ने राष्ट्रपति मोहम्मद मोर्सी को कुर्सी से हटा दिया था.

मुस्लिम ब्रदरहुड के सदस्य और एक यूनिवर्सिटी लेक्चरर महमूद खलीफा के मुताबिक जनरल अल-सीसी की नियुक्ति के समय एक आम धारणा थी कि “जनरल सीसी एक धार्मिक व्यक्ति हैं.”

महमूद खलीफा कहते हैं, “कुछ लोगों ने उन पर आरोप लगाया कि वो मुस्लिम ब्रदरहुड के छिपे हुए समर्थक हैं. इस तरह के दावे किए गए थे कि उन्हें कुरान ज़ुबानी याद है और मुझे लगता था कि वो इस पद के लिए सही आदमी हैं.”

आज उनकी राय बहुत अलग है. जनरल सीसी के तख्तापलट करने के बाद मुस्लिम ब्रदरहुड के कई समर्थकों समेत सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है.

डॉक्टर खलीफा कहते हैं, “उनकी तुलना में मुबारक तो फरिश्ते थे. धार्मिक होने की बातें सिर्फ खुद को बेचने की तकनीक थी.”

अब मिस्र में जनरल के कई दोस्त और प्रशंसक हैं जो ढोंग की बातों को खारिज कर देते हैं, लेकिन इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि वो ऐसे शख़्स हैं जो अपनी छवि नियंत्रित करना चाहते हैं.

शख्सियत

न्यूज़वीक पत्रिका और डेली बीस्ट वेबसाइट के मध्य पूर्व संवाददाता माइक गिग्लियो को जनरल अल-सीसी के बारे में लिखने को कहा गया था और उनका कहना है कि ये उनके लिए अब तक का सबसे चुनौतीपूर्ण काम था.

माइक गिग्लियो कहते हैं, “उनके बारे में छोटी-छोटी निजी जानकारी पता करना वाकई में आश्चर्यजनक रूप से मुश्किल था.”

मिस्र में मोर्सी को सत्ता से हटाए जाने के बाद से जनरल अल-सीसी मध्यवर्ग में लोकप्रिय हुए हैं.

जब माइक गिग्लियो और उनकी टीम ने जनरल अल-सीसी के बारे में उन इलाकों में शोध शुरू किया जहां उनके परिवार की जड़ें थीं तो उन्होंने पाया कि जो लोग मदद करने वाले लगते थे वो भी “पहले फोन करते, फिर हमें फोन करते और कहते कि वो बात नहीं कर सकते.”

माइक गिग्लियो ने पाया कि “जनरल अल-सीसी अपनी छवि पर नियंत्रण को लेकर बहुत-बहुत सतर्क हैं. उनके पास इस बारे में योजना है कि वो कैसे दिखना चाहते हैं और उनके बारे में जानकारी कैसे बाहर आए और अपने बारे में निजी जानकारी ज़ाहिर करना अभी इसमें शामिल नहीं है.”

काहिरा की अमरीकन यूनिवर्सिटी में इतिहास विभाग के प्रमुख खालिद फहमी का मानना है कि वो भी वर्दी के साथ आने वाले आकर्षण का इस्तेमाल न करने से ऊपर नहीं हैं.

जब से राष्ट्रपति मोर्सी को हटाया गया मिस्र का सरकारी टीवी उत्साह से भरा हुआ एक वीडियो दिखाता रहता है जिसमें बारबार अल-सीसी की तस्वीरें आती हैं और रॉकेट, टैंक के साथ फुर्तीले नौजवान अपनी शारीरिक ताकत दिखाते हुए नज़र आते हैं.

फहमी कहते हैं, “मध्यवर्गीय और उच्च वर्गीय महिलाएं उन्हें युवा, आकर्षक, ताकतवर और ऐसा शख्स मानती हैं जो नियंत्रण कर रहे हैं.”

सत्ता के सूत्रधार

तकनीकी रूप से वो रक्षा मंत्री हैं लेकिन किसी को शक नहीं है कि आज ताकत किसके पास है. उनका जन्म 1954 में काहिरा के गमलेया इलाके में हुआ था.

अगर आप बतौर सैलानी काहिरा गए हैं तो हो सकता है आपने वहां खरीदारी भी की हो.

यहां के सड़कों पर लगने वाले बाज़ार मशहूर हैं. हो सकता है कि आपने उनके परिवार के बनाए किसी प्रतीक को भी खरीदा हो. जनरल अल-सीसी के पिता हसन ने फर्नीचर, सीप और लकड़ी से सजावटी गहने बनाने के सामान का कारोबार शुरू किया था.

माना जाता है कि उनका परिवार धार्मिक और देशभक्त रहा है.

मोहम्मद मोर्सी को सत्ता से हटाए जाने के बाद से हुए प्रदर्शनों में सैकड़ों लोग मारे गए हैं.

माइक गिग्लियो ने एक दिलचस्प बात जनरल अल-सीसी के पिता के बारे में पता की.

जब जनरल अल-सीसी के पिता को कुछ बनवाना होता तो वो मज़दूरों को बगैर ये बताए कोई काम दे देते कि बनाना क्या है और फिर वो ख़ुद ही टुकड़ों को जोड़ते थे.

गिग्लियो बताते हैं, “जब वो पर्दा खींचते और उन्हें बताते कि वो बना क्या रहे थे तो सारे कर्मचारी हैरान रह जाते.”

जनरल अल-सीसी ने अपना काम दिखाने से पहले सावधानी से गुणा-भाग करने की छवि बनाई है.

‘चुस्त दिमाग वाले छात्र’

ज़्यादा पढ़ाई और पैसे के बिना ज़िंदगी शुरू करने वाले महत्वाकांक्षी युवा के लिए सेना स्वाभाविक पसंद थी. सेना में आगे बढ़ते हुए उन्होंने ब्रिटेन में स्टाफ कॉलेज में पढ़ाई की और साल 2005 में मास्टर्स डिग्री के लिए पेन्सिलवेनिया के आर्मी कॉलेज भेजे गए थे.

आर्मी कॉलेज में उन्हें पढ़ाने वाली शरीफ ज़ुहर उन्हें ‘चुस्त दिमाग वाले छात्र’ के रूप में याद करती हैं जो ‘निरंतर विचारों में डूबे’ रहते थे.

कॉलेज के दौरान ही जनरल अल-सीसी ने ‘मध्य पूर्व में लोकतंत्र’ नाम से एक शोध पत्र लिखा था जिसमें उन्होंने तर्क दिया कि नए लोकतंत्र में इलाके का ‘धार्मिक स्वभाव’ झलकना चाहिए.

उन्होंने शिकायत की कि ‘सरकारें धर्मनिरपेक्ष शासन की ओर झुकती हैं जिससे जनसंख्या का बड़ा हिस्सा हाशिए पर चला जाता है. जो ये मानता है कि सरकार से धर्म को अलग नहीं होना चाहिए. अपनी सीमा से आगे बढ़कर सरकारी मसलों में दखल देने वाले धार्मिक नेताओं को अक्सर बगैर मुकदमे के जेल भेज दिया जाता है.’

कोई भी कल्पना कर सकता है कि होस्नी मुबारक के दौर में मुस्लिम ब्रदरहुड का कोई भी समर्थक ये पढ़ता तो दिल से कहता “सुनो इसे.”

'मोर्सी का आदमी'

इस तरह के विचारों से ये समझने में मदद मिलती है कि क्यों शुरुआत में उन्हें मोहम्मद मोर्सी से सहारा मिला. जब फ़ील्ड मार्शल तंतावी की जगह जनरल अल-सीसी रक्षा मंत्री और सेना प्रमुख बने तो उन्हें मोर्सी का आदमी समझा जाता था.

हालांकि खालिद फहमी मानते हैं कि हो सकता है कि वो धार्मिक मुसलमान हों लेकिन वो हमेशा ब्रदरहुड को शक की नज़र से देखते थे.

ब्रदरहुड के लिए सेना की चिढ़ बहुत गहरी है और जनरल अल-सीसी की ज़िंदगी ही सेना में बीती है.

18 अगस्त को जनरल अल-सीसी ने मिस्र के लोगों से कहा कि उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं है. टेलीविज़न पर दिए एक भाषण में उन्होंने कहा कि “ये सेना का राज नहीं है और न ही उनकी मिस्र पर राज करने की ज़रा सी भी इच्छा है.”

सभी उन पर यक़ीन नहीं करते और माइक गिग्लियो का फैसला है कि “उनके विरोधी भी मानते हैं कि अगर जनरल अल-सीसी वाकई अगला चुनाव लड़ते हैं तो वो बड़े अंतर से जीत जाएंगे.”

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार