पुराने अमरीकी कपड़ों ने छीना दर्ज़ियों से काम

  • 31 अगस्त 2013
मलावी, अफ्रीका

मलावी की राजधानी लिलांग्वे में इन दिनों दर्ज़ियों की मशीनें खाली पड़ी हैं क्योंकि लोग नज़दीक ही बिक रहे पुराने कपड़ों की छंटाई कर रहे हैं.

दरअसल यूरोप और अमरीका से आने वाले दान के कपड़े यहां सस्ते में लोगों को मिल रहे हैं.

इसके अलावा चीन के सस्ते कपड़े भी हैं. दोनों ने मिलकर दर्ज़ियों का धंधा चौपट कर दिया है.

लेकिन पुराने कपड़े बेचने वाले लोग इस व्यापार से बेहद ख़ुश हैं.

गरीबों के कपड़े

मलावी की राजधानी लिलांग्वे के पुराने कस्बे में उस्मान काबेरे के पास दस दर्ज़ी हैं.

वह 1978 से सूट सिल रहे हैं, लेकिन तब इस काम में अच्छा फ़ायदा था.

लेकिन गरीबी में जी रहे ज़्यादातर मलावी वासी पुराने कपड़ों के बाज़ार की ओर रुख कर गए हैं.

इस वक्त मलावी में पुराने कपड़ों का बाज़ार करीब 64.30 करोड़ रुपये का है. 1990 के मुकाबले यह दस गुना है.

पुराने कपड़ों के ग्राहक अच्छे ब्रांड के इन कपड़ों से ख़ुश हैं. उन्हें यह टिकाऊ और अलग लगते हैं.

एक ग्राहक ग्रेस गोन्द्वे कहती हैं, "अगर आप किसी स्थानीय दुकान से कपड़े खरीदते हैं तो वैसी ही चीज़ पहने हुए कोई और भी दिख जाता है."

मलावी, अफ्रीका

लेकिन काबेरे की दिक्कत सिर्फ़ पुराने कपड़े ही नहीं हैं. उनके व्यापार को चीन से आयातित सस्ते कपड़ों ने भी धक्का पहुंचाया है.

वह बताते हैं, "दरअसल जब आप कपड़ा खरीदकर हमसे सिलवाते हैं तो सूट करीब चार हज़ार रुपये का पड़ता है. जबकि चीनी सूट सिर्फ़ डेढ़ हज़ार से कुछ अधिक में मिल जाता है. एक सूट पर यह बड़ा फ़र्क है."

मलावी के उद्योग और व्यापार मंत्रालय के प्रवक्ता विस्कस कोम्बेज़ी कहते हैं कि पुराने कपड़ों का उद्योग एक "दोधारी तलवार" है.

उनका कहना है, "मलावी में ज़्यादातर लोग गरीब हैं और वे ये सस्ते कपड़े ख़रीद सकते हैं."

'हमारा जवाब नहीं'

दरअसल अफ्रीका विकास और अवसर कानून (एजीओए) के तहत अमरीका ने अफ्रीका से आयात की जाने वाली वस्तुओं पर से आयात शुल्क हटा लिया है.

मलावी, अफ्रीका

इस अनुबंध के तहत मलावी कपड़े बनाने के लिए विदेशी कपड़े का इस्तेमाल कर सकता है.

हालांकि इस अनुबंध का मलावी के लोगों की ज़िंदगी पर असर कम ही दिखता है.

कपड़ों के आयात के लिए स्थापित कंपनियां पिछले कुछ सालों में बंद हो गई हैं.

यह एजीओए का वक्त बढ़ने को लेकर अनिश्चितता की वजह से बंद हुईं. यह कानून साल 2008 तक लागू था जिसे सात साल के लिए बढ़ा दिया गया लेकिन जब कानून का वक्त बढ़ा तब तक ज़्यादातर कंपनियां अपना कारोबार समेट चुकी थीं.

काबेरे के पास लोग अब सूट सिलने के लिए तो नहीं आते लेकिन सस्ते चीनी सूटों ने उन्हें एक दूसरा काम दे दिया है. चीनी कपड़ों को दुरुस्त करवाने के लिए लोग उनके पास आते हैं.

वह कहते हैं, "चीनी कपड़े लंबे समय तक नहीं पहने जा सकते. इसलिए लोग उन्हें हमारे पास लाते हैं. हमारी गुणवत्ता का उनके पास जवाब नहीं."

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