मिस्र: घिरी मस्जिद के चारों ओर तनाव

  • 17 अगस्त 2013
मिस्र हिंसा
Image caption शुक्रवार को हुई हिंसा में 80 से ज़्यादा लोग मारे गए

मिस्र में सुरक्षाकर्मियों ने काहिरा की एक मस्जिद को घेर रखा है जिसमें मुस्लिम ब्रदरहुड के कई सौ समर्थकों ने रात बिताई. उधर पूरे देश में हिंसा का दौर जारी है.

शुक्रवार को मिस्र के अलग-अलग इलाक़ो में अपदस्थ राष्ट्रपति मोहम्मद मोर्सी के समर्थकों और सुरक्षाकर्मियों के बीच हुई हिंसक झड़पों में अब तक 80 लोगों के मारे जाने की ख़बर है.

मरने वालों में सबसे ज्यादा तादाद राजधानी क़ाहिरा से है जहां सुरक्षाकर्मियों ने प्रदर्शन कर रहे मुस्लिम ब्रदरहुड के समर्थकों पर गोलियां चलाईं.

मुस्लिम ब्रदरहुड के समर्थक बुधवार को हुई हिंसा के विरोध में शुक्रवार को 'ग़ुस्से का दिन' मना रहे थे.

क़ाहिरा के अलावा और कई इलाकों से भी हिंसा की ख़बरें हैं. मिस्र के दूसरे बड़े शहर एलेक्ज़ेंड्रिया में 20 लोग मारे गए हैं.

मुस्लिम ब्रदरहुड ने कहा है कि उनके समर्थक पूरे मिस्र में एक सप्ताह तक हर रोज़ विरोध प्रदर्शन करते रहेंगे.

Image caption मुस्लिम ब्रदरहुड के सैंकड़ों सदस्य हिंसक झड़पों में घायल भी हुए हैं

बुधवार को हुई हिंसा में 638 लोग मारे गए थे.

इसके विरोध में शुक्रवार को जुमा की नमाज़ के बाद हज़ारों की तादाद में मुस्लिम ब्रदरहुड के समर्थक क़ाहिरा के रैमसेस चौक पर जमा हुए थे.

हिंसक भीड़

प्रदर्शनकारी 'जनता इस तख़्तापलट को समाप्त करना चाहती है' के नारे लगा रहे थे.

बीबीसी संवाददाता जेरेमी बोवेन के अनुसार प्रदर्शऩ उस समय हिंसक हो गया जब प्रदर्शनकारियों ने एक पुलिस स्टेशन को आग लगा दी.

इसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने भी गोलियां चलानी शुरू कर दीं.

प्रदर्शऩकारी सेना समर्थित अंतरिम सरकार के ख़िलाफ़ नारे लगा रहे थे.

Image caption हिंसा के बावजूद शनिवार को भी प्रदर्शनों का आह्वान किया गया है

मुस्लिम ब्रदरहुड के एक समर्थक का कहना था, ''हमने चुनावों के ज़रिए एक राष्ट्रपति को सत्ता पर बिठाया था लेकिन उन्होने टैंकों के ज़रिए एक कठपुतली को खड़ा किया है जो गोलियां चलाता है. लेकिन मिस्र की जनता डरेगी नहीं. मोर्सी के समर्थक नहीं डरेंगे.''

ग़द्दार

प्रदर्शनकारी मिस्र के सेना जनरल अल-सिसि के विरोध में भी नारे लगा रहे थे. वे जनरल सिसि को 'ग़द्दार' कह रहे थे.

एएफ़पी समाचार एजेंसी ने मिस्र की अंतरिम सरकार के हवाले से ख़बर दी है कि शुक्रवार को 1000 से ज़्यादा इस्लामी समर्थकों को गिरफ़्तार किया.

शनिवार को एक वक्तव्य में गृह मंत्रालय ने कहा, "गिरफ़्तार किए गए मुस्लिम ब्रदरहुड समर्थकों की संख्या 1004 तक पहुंच गई है." मंत्रालय का कहना था कि काहिरा में 558 गिरफ़्तारियां की गईं.

उधर अपदस्थ राष्ट्रपति मोर्सी के विरोधी संगठन 'नेश्नल सैलवेशन फ़्रंट' और 'तमरूद' ने भी मुस्लिम ब्रदरहुड के विरोध में प्रदर्शन करने का आह्वान किया है. पूरे मिस्र में अपने पड़ोसियों और गिरजाघरों की सुरक्षा के लिए भी अपील की गई है.

Image caption सैंकड़ों की तादाद में समर्थकों की मौत के बाद भी प्रदर्शन जारी हैं

मुस्लिम ब्रदरहुड के कुछ समर्थकों ने कहा है कि कॉप्टिक ईसाइयों ने मोर्सी के बेदख़ल किए जाने का समर्थन किया है. इसलिए आशंका जताई जा रही है कि ईसाई लोग भी हिंसा के शिकार बनाए जा सकते हैं.

उधर बुधवार को हुई हिंसा की पूरे अंतरराष्ट्रीय जगत में कड़ी निंदा की गई है. अमरीका और संयुक्त राष्ट्र समेत सभी ने इसकी घोर आलोचना की है. तुर्की ने मिस्र से अपने राजदूत को वापस बुला लिया है.

सऊदी का समर्थन

लेकिन सऊदी अरब के राजा अबदुल्लाह ने मिस्र की मौजूदा सरकार का समर्थन करते हुए कहा कि सऊदी अरब की जनता और सरकार 'आतंकवाद' के विरोध में अपने मिस्री भाइयों के साथ खड़ी है.

गणतांत्रिक तरीक़े से चुने हुए मिस्र के पहले राष्ट्रपति मोहम्मद मोर्सी को सेना ने तीन जुलाई को सत्ता से बेदख़ल कर दिया था. मोर्सी फ़िलहाल हिरासत में हैं और उन पर हत्या के आरोप दर्ज हैं.

सरकारी मीडिया के अनुसार गुरुवार को मोर्सी की हिरासत को और 30 दिनों के लिए बढ़ा दिया गया है.

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