अफ़ग़ानिस्तान: भारतीय भूमिका पर उठी उंगली

  • 7 अगस्त 2013
अफ़गानिस्तान-पाकिस्तान के लिए अमरीका के ख़ास दूत जेम्स डॉबिंस
Image caption अफ़गानिस्तान-पाकिस्तान के लिए अमरीका के ख़ास दूत जेम्स डॉबिंस

अमरीका के विशेष दूत जेम्स डॉबिंस का कहना है कि पाकिस्तान ने अफ़गानिस्तान में भारत की मौजूदगी से जुड़ी अपनी चिंताओं को बढ़ा-चढाकर पेश किया है लेकिन ये पूरी तरह बेबुनियाद भी नहीं हैं.

पाकिस्तान अकसर सीमावर्ती अफ़गान शहरों कंधार और जलालाबाद में भारतीय वाणिज्य दूतावासों की मौजूदगी पर सवाल उठाता रहा है.

उनका आरोप है कि इन दूतावासों का इस्तेमाल पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रांत और अन्य सरहदी इलाकों में अशांति और हिंसा भड़काने के लिए किया जा रहा है.

भारत इसका सख़्ती से खंडन करता रहा है.

"घुसपैठ"

लेकिन ये पहली बार है जब किसी अमरीकी राजदूत ने रिकॉर्ड पर जाकर भारत की भूमिका पर उंगली उठाई है.

अफ़गानिस्तान-पाकिस्तान के लिए अमरीका के विशेष दूत जेम्स डॉबिंस ने बीबीसी के साथ एक ख़ास बातचीत में कहा है कि पाकिस्तान से भारी तादाद में चरमपंथी अफ़गानिस्तान में घुसपैठ करते हैं.

उनका कहना था, “लेकिन हमें पता है कि उनके कुछ विरोधी चरमपंथी दूसरी तरफ़ से भी पाकिस्तान में घुसते हैं. तो पाकिस्तान की चिंताएं बेबुनियाद नहीं हैं लेकिन हमारी नज़रों में उन्हें बढ़ा-चढाकर पेश किया जा रहा है.”

अफगानिस्तान को लेकर पाक की चिंताएँ क्या हैं?

डॉबिंस का कहना था कि कंधार और जलालाबाद में भारतीयों की संख्या गिनी-चुनी है और अफ़गानिस्तान के साथ भारत के संबंधों को ध्यान में रखते हुए दूतावासों का खोलना ग़लत नहीं लगता.

भारत ने अफ़गानिस्तान के विकास कार्यक्रमों में दो अरब डॉलर से भी ज़्यादा का निवेश किया है और उनका कहना है कि ये दूतावास उन्हीं कार्यक्रमों को चलाने के लिए हैं.

डॉबिंस पिछले हफ़्ते ही अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान का दौरा करके लौटे हैं.

"अफ़गानिस्तान की ज़रूरत"

Image caption 3 अगस्त को जलालाबाद में भारतीय दूतावास पर हुए हमले के बाद गश्त करते अफगानी पुलिस बल

अफ़गानिस्तान से अमरीकी फ़ौज की वापसी के मामले पर उन्होंने कहा है कि अगर काबुल चाहे तभी अमरीका वहां से पूरी फ़ौज हटाएगा.

उनका कहना था, “अफ़गानिस्तान को नैटो फ़ौज की ज़रूरत है, अफ़गानिस्तान उनकी मौजूदगी चाहता है और हमने उनसे वादा किया है कि हमारी फ़ौज वहां रहेगी.”

जून में राष्ट्रपति ओबामा और राष्ट्रपति करज़ई के बीच एक तल्ख़ वीडियो कांफ़्रेस के बाद इस तरह की अटकलबाज़ियां गर्म हो रही थीं कि 2014 के बाद अमरीका अपनी पूरी फ़ौज वापस ले आएगा.

डॉबिंस ने बीबीसी को बताया कि अफ़गानिस्तान पर हमला करने वाले चरमपंथियों की पाकिस्तान में मौजूदगी को लेकर उनकी वहां के अधिकारियों से लंबी बातचीत हुई है.

उनका कहना था कि जिस आज़ादी के साथ अफ़गान चरमपंथी पाकिस्तान में रहकर अपना काम कर रहे हैं वो चिंताजनक है.

डॉबिंस का कहना था कि इस सीमापार घुसपैठ को रोकने के लिए पाकिस्तान, अफ़गानिस्तान और अमरीका को मिल-जुलकर बात करनी होगी.

डॉबिंस ने उम्मीद जताई है कि अफ़गान तालिबान के साथ बातचीत जल्द ही शुरू हो सकेगी.

उनका कहना है कि 2014 के बाद अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान के भविष्य को लेकर बहुत ज़्यादा उम्मीद नहीं की जा सकती लेकिन अगर दोनों देश मिलकर काम करें तो सभी मुश्किलों का हल निकल सकता है.

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