आधी शताब्दी बाद ऑस्कर में प्रविष्टि भेजेगा पाकिस्तान

  • 7 अगस्त 2013

पाकिस्तान क़रीब 50 साल के लंबे अंतराल के ऑस्कर पुरस्कारों के लिए अपनी प्रविष्टि भेजेगा.

ऑस्कर जीतने वाली पहली पाकिस्तानी शरमीन ओबैद चिनॉय की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है, जो इन प्रतिष्ठित पुरस्कारों के लिए भेजी जाने वाली फ़िल्म का चुनाव करेगी.

चिनॉय के सह निर्देशन में बनी डॉक्यूमेंट्री ‘सेव फेस’ को साल 2012 में ऑस्कर के लिए चुना गया था. ये डॉक्यूमेंट्री एसिड हमलों के पीड़ितों पर आधारित थी.

चिनॉय ने कहा कि पाकिस्तान ने अब तक केवल दो फ़िल्मों को ही ऑस्कर के लिए भेजा है. साल 1959 में एजे कारदर की फ़िल्म ‘जागो हुआ सवेरा’ और 1963 में ख़्वाजा खुर्शीद अनवर की फ़िल्म ‘घूंघट’ को ऑस्कर के लिए भेजा गया था लेकिन दोनों फ़िल्मों को नामांकन नहीं मिला.

संघर्ष

उन्होंने संवाद एजेंसी एएफपी से कहा, “हम ऐसी फ़िल्मों की तलाश है जो सही मायनों में पाकिस्तानी सिनेमा का प्रतिनिधित्व करती हैं और जो ऑस्कर में सर्वश्रेष्ठ विदेशी फ़िल्म श्रेणी में देश का प्रतिनिधित्व करेगी.”

चिनॉय ने कहा, “हम सभी पाकिस्तानी फ़िल्मकारों को अपनी प्रविष्टि भेजने के लिए उत्साहित कर रहे हैं और हमें सकारात्मक जवाब मिलने की पूरी उम्मीद है.”

उन्होंने कहा कि देश की फ़िल्म इंडस्ट्री दशकों तक संघर्ष करने के बाद फिर से खड़ी हो रही है.

चिनॉय ने कहा, “पाकिस्तानी फ़िल्म उद्योग फिर से खड़ा हो रहा है, पाकिस्तानी लोग फिर फ़िल्मों का रुख़ कर रहे हैं, नए थिएटर बन रहे हैं और छात्रों का रुझान कला की तरफ बढ़ रहा है.”

समिति

समिति में चिनॉय के अलावा तीन और महिला सदस्य शामिल हैं. ये हैं लेखक और निर्देशक अकीफ़ा मियां, अभिनेत्री समीना पीरज़ादा और निर्माता निर्देशक महरीन जब्बार.

इसके अलावा समिति में लेखक मोहसिन हामिद, अभिनेता राहत काज़मी और कला के विद्वान फ्रेमजी मिनवाला को भी शामिल किया गया है.

चिनॉय ने कहा कि पाकिस्तानी फ़िल्मकारों को संसाधनों के स्तर पर संघर्ष करना पड़ रहा है क्योंकि उनके पास फ़िल्म निर्माण से जुड़े आधुनिक उपकरणों का अभाव है.

उन्होंने साथ ही कहा कि देश में फ़िल्म निर्माण की आधुनिक तकनीक सिखाने वाले संस्थानों की कमी है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार