ममनून हुसैन के मन में आगरा का ख़ास मकाम

  • 1 अगस्त 2013
ममनून हुसैन

पाकिस्तान के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ममनून हुसैन आगरा का नाम आते ही जज्बाती हो जाते हैं. हो भी क्यों न, इस शहर से उनका पुराना रिश्ता रहा है.

जैसा कि वे ख़ुद कहते हैं- हर इंसान जहाँ पैदा होता है या जहाँ उसकी पढ़ाई होती है, वहाँ से उसका जज़्बाती लगाव होता है.

बीबीसी के साथ विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि अगर उन्हें मौक़ा मिला तो वे भारत के साथ रिश्ते बेहतर करने के लिए अपनी ओर से पूरी कोशिश करेंगे.

उन्होंने कहा, "अगर मुझे मौक़ा मिला, तो मैं अपनी ओर से भरपूर कोशिश करूँगा. मेरी पैदाइश आगरा से है, मैं वहाँ से आया था, तो शायद मुझे इसमें शामिल भी किया जाए."

ममनून हुसैन पाकिस्तान के नए राष्ट्रपति चुने गए हैं. सितंबर में आसिफ अली जरदारी के पद छोड़ने के बाद ममनून हुसैन राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे.

73 वर्षीय ममनून हुसैन पेशे से कपड़ा कारोबारी हैं और प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के क़रीबी रहे हैं. उनका जन्म भारत के ऐतिहासिक शहर आगरा में हुआ था और विभाजन के बाद वे पाकिस्तान चले गए थे.

ममनून हुसैन कहते हैं कि प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने तो पहले ही अपना इरादा स्पष्ट कर दिया है कि वे न सिर्फ़ हिंदुस्तान बल्कि सभी पड़ोसी देशों के साथ बेहतर रिश्ते चाहते हैं. क्योंकि वे मानते हैं कि पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते ख़राब करके कोई देश अच्छी तरह से आगे नहीं बढ़ सकता.

यादों का पिटारा

ताजमहल

राजनीति के बीच जैसे ही आगरा की बात आई, लगा जैसे उनकी यादों का पिटारा खुल गया हो.

आगरा की यादों में एकाएक खो गए ममनून हुसैन ने बताया, "जब मैं आगरा से पाकिस्तान आया था, तो मेरी उम्र साढ़े आठ साल थी. ज़ाहिर है इंसान जहाँ पैदा होता है, वहाँ से उसका जज्बाती लगाव होता है. मेरे जेहन में बचपन की बहुत सी यादें हैं."

आगरा की बात हो और ताजमहल का ज़िक्र न आए, ऐसा कैसे हो सकता है. ममनून हुसैन ने बताया कि अक्सर सुबह के वक़्त उनके दादा उन्हें बग्घी में बैठाकर ताजमहल की सैर कराने ले जाते थे.

बातों-बातों में उन्होंने राष्ट्रपति के रूप में आगरा जाने की इच्छा भी जता दी.

उन्होंने कहा, " मेरा ख्वाहिश होगी कि मैं वहाँ जाऊँ. ताजमहल देखने का उत्साह रहता है. मैं जब पहली बार पाकिस्तान से आगरा गया, तो मुझे ऐसा लगा कि जैसे मैं ख़्वाब देख रहा हूँ, जब मैंने ताजमहल को देखा."

ममनून हुसैन के जेहन में आगरा के लिए एक ख़ास मकाम है. उनका कहना है कि अगर आगरा के लोग उनके लिए अच्छे जज़्बात रखते हैं, तो उन्हें उनका इंतज़ार करना चाहिए.

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