अमरीकाः स्नोडेन पर जासूसी का मुक़दमा दर्ज

  • 22 जून 2013
एडवर्ड स्नोडेन
एडवर्ड स्नोडेन अमरीका से लापता हैं

अमरीकी न्याय विभाग ने सीआईए के पूर्व कर्मचारी एडवर्ड स्नोडेन के खिलाफ आपराधिक मुक़दमा दर्ज कराया है. स्नोडेन के ख़िलाफ़ मुक़दमा ख़ुफ़िया निगरानी अभियान का ब्यौरा सार्वजनिक करने के आरोप में दर्ज कराया गया है.

अमरीकी राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी यानी एनएसए के पूर्व कर्मचारी एडवर्ड स्नोडेन के ख़िलाफ़ जासूसी और सरकारी संपत्ति की चोरी के आरोप हैं.

अदालती दस्तावेज़ों के मुताबिक वर्जीनिया के पूर्वी ज़िले की एक संघीय अदालत में शिकायत दर्ज कराई गई और अस्थायी गिरफ़्तारी वारंट जारी किया गया.

इस साल मई में फोन कॉल्स के रिकॉर्ड औरइंटरनेट डेटापर निगरानी रखे जाने का खुलासा करने के बाद स्नोडेन मई में हॉन्गकॉन्ग चले गए थे. इसके बाद से उनका अता-पता नहीं है.

ख़बर है कि अमरीका हॉन्गकॉन्ग से स्नोडेन के प्रत्यर्पण का अनुरोध करने वाला है.

कौन हैं एडवर्ड स्नोडेन

स्नोडेन पर ‘सरकारी संपत्ति की चोरी’, ‘राष्ट्रीय रक्षा सूचना के अनधिकृत संचार’ और ‘जान-बूझकर ख़ुफ़िया सूचना का संचार’ का आरोप लगा है.

इनमें हर आरोप के लिए अधिकतम 10 साल की जेल की सज़ा का प्रावधान है. गोपनीय सूचना जारी करने से जुड़ी शिकायत 14 जून को दर्ज कराई गई थी, लेकिन इसे शुक्रवार को ही सार्वजनिक किया गया.

वॉशिंगटन में बीबीसी संवाददाता केटी वॉटसन का कहना है कि इस क़दम से पता चलता है कि अमरीकी प्रशासन इस मुद्दे पर कितना गंभीर है.

देशद्रोह का क़दम

सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति के एक सदस्य और डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर बिल नेल्सन ने अमरीकी प्रशासन के क़दम का स्वागत किया.

स्नोडेन के खुलासे के बाद बराक ओबामा प्रशासन को काफी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी

उन्होंने कहा, "यह देशद्रोह जैसा क़दम है. मुझे लगता है कि हॉन्गकॉन्ग की सरकार उन्हें हिरासत में लेकर अमरीका को सौंप देगी."

संवाददाताओं के मुताबिक अमरीका और हॉन्गकॉन्ग क़ानूनी मामलों में एक दूसरे का सहयोग करते हैं, लेकिन स्नोडेन के पास भी अपील का अधिकार है, ऐसे में प्रत्यर्पण की कार्यवाही में देरी हो सकती है.

'प्रिज़्म' का तिलिस्म

स्नोडेन ने आरोप लगाया था कि एनएसए के एक गोपनीय अभियान ‘प्रिज़्म’ के तहत बड़ी तादाद में फ़ोन कॉल्स और इंटरनेट से जुड़ी जानकारियां इकट्ठी की गई हैं.

स्नोडेन का आरोप था कि अमरीकी ख़ुफ़िया विभाग चीनी कंप्यूटर नेटवर्क की हैंकिंग भी करता था. इस ख़ुलासे के बाद ओबामा प्रशासन के लिए भारी शर्मिंदगी की स्थिति बन गई थी.

इसके बाद से ही अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी ने दुनिया भर के निजी यूज़रों के टेलीफोन और इंटरनेट डेटा हासिल करने की कार्रवाई का बचाव करना शुरू कर दिया.

उनका कहना है कि किसी अमरीकी या अमरीकी बाशिंदे को 'प्रिज़्म' के तहत निशाना नहीं बनाया गया है और इसकी देखरेख न्यायाधीश करते हैं.

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