चीन सरकार ने मानी 'कैंसर गांवों' की बात

  • 23 फरवरी 2013
चीन में प्रदूषण
प्रदूषण से निपटना चीन सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है.

चीन में कुछ इलाके प्रदूषण की बड़ी मार झेल रहे हैं. चीन के पर्यावरण मंत्रालय की रिपोर्ट में पहली बार एक ऐसे गांवों के बारे में जिक्र किया गया है जिन्हें 'कैंसर गांव' कहा जाता है.

वर्षों से कई सामाजिक संगठन कहते रहे हैं कि फैक्ट्रियों के पास बसे गांवों में कैंसर की बीमारी तेजी से बढ़ रही है. प्रदूषित पानी को इसकी एक बड़ी वजह माना जाता है.

लेकिन कैंसर गांव की कोई तकनीकी परिभाषा नहीं है और मंत्रालय की रिपोर्ट में भी इस पर विस्तार से कुछ नहीं कहा गया है.

चीन से बार बार ये अपीलें की जाती रही हैं कि वो अपने यहां प्रदूषण को लेकर पारदर्शिता अपनाएं.

लोगों में गुस्सा

चीनी मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे बहुत से नुकसानदायक रसायनों का उत्पादन और उपभोग चीन में अब भी पाया जाता है जो विकसित देशों में प्रतिबंधित है.

रिपोर्ट कहती है, “जहरीले रसायनों की वजह से पर्यावरण संबंधी आपातस्थितियां पैदा हो रही है जो पानी और वायु प्रदूषण से जुड़ी हैं.”

रिपोर्ट में माना गया है कि इस तरह के रसायनों से मानवीय स्वास्थ्य के लिए दीर्घकालीन जोखिम पैदा हो सकते हैं और इस सीधे पर तथाकथित कैंसर गांव से जोड़ा गया है.

रिपोर्ट के अनुसार, “कुछ इलाकों में कैंसर गांवों जैसे मामले दिख रहे हैं जो स्वास्थ के साथ साथ सामाजिक रूप से गंभीर समस्याएं हैं.”

बीजिंग में बीबीसी संवाददाता मार्टिन पेशेंस का कहना है कि चीन में हाल के वर्षों में बड़ी तेजी से विकास हुआ है, ऐसे में तथाकथित कैंसर गांवों के बारे में चर्चाएं बढ़ी हैं.

चीन में वायु प्रदूषण और औद्योगिक कचरे को लेकर लोगों का गुस्सा भी बढ़ रहा है.

बीजिंग में धुआं

कैंसर गांवों की चर्चा मीडिया में भी बहुत होती रही है. 2009 में एक चीनी पत्रकार ने एक नक्शा प्रकाशित किया था जिसके कैंसर से प्रभावित दर्जनों गांवों को दर्शाया गया था.

बीबीसी ने 2007 में दक्षिणी चीन में शांगपा नाम के एक गांव का दौरा किया जहां एक वैज्ञानिक गांव पर प्रदूषण के प्रभावों का अध्य्यन कर रहा था.

इस वैज्ञानविक को पानी में जहरीले भारी तत्व मिले और माना जाता है कि इस इलाके में कैंसर और खनन के बीच सीधा संबंध है.

हालांकि अब तक सरकार की तरफ से इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहा गया था.

बीजिंग में एक प्रदूषण सहायता केंद्र चलाने वाले पर्यावरणविद् वांग कानफा ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि किसी सरकारी मंत्रालय की रिपोर्ट में पहली बार ‘कैंसर गांव’ का जिक्र किया गया है.

पिछले महीने बीजिंग और कई शहर प्रदूषण के कारण कई दिनों तक धुएं मिश्रित कोहरे की चपेट में रहे जिसमें विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सेहत के लिए खतरनाक बताया.

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