जब आप दुनिया की सबसे ऊंची इमारत में रहते हों

  • 4 दिसंबर 2012

तेजी से तरक्की कर रही दुनिया में गगनचुंबी इमारतों की संख्या बढ़ रही है. इन इमारतों में न सिर्फ बड़े बड़े दफ्तर और रेस्त्रां हैं, बल्कि अब तो लोग वहां रह भी रहे हैं.

आइए जानें दुनिया की गगनचुंबी इमारतों का कैसे रखरखाव होता है और उन्हें लेकर आर्किटेक्ट किन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं.

बुर्ज को चलाना

इस इमारत में 160 से ज्यादा मंजिलें हैं, इसलिए इसका रखरखाव करने वाली टीम हमेशा व्यस्त होती है. दुनिया की इस सबसे ऊंची इमारत को सुगम तरीके से चलाना खासा चुनौती पूर्ण है अब बात वहां होने वाले कचरे से निपटने की हो या फिर खिड़कियों के कांच को साफ करने की.

इमारत के बाहरी शीशों को साफ़ करने वाली टीम के सुपरवाइज़र बाली कर्ण ओली तो शुरू में काफ़ी डर गए थे.

उन्होंने कहा, "जब मैं पहली बार बाहर शीशे साफ़ करने के लिए लटका तो मैं डर गया था. हमने नीचे से सफ़ाई शुरू की और ऊपर की ओर जाते गए. मैं काफ़ी डरा हुआ था. लेकिन दो-तीन सफ़ाई के बाद सब ठीक हो गया."

74वीं मंजिल पर जिंदगी

आम तौर पर गगनचुंबी इमारतों का इस्तेमाल दफ्तरों के लिए किया जाता है लेकिन अब ऐसे लोगों की संख्या बढ़ रही हैं जो वहां अपना घर बना रहे हैं.

ऑस्ट्रेलिया में मेलबर्न के यूरेका टावर में कई लोग रहते हैं. ये दुनिया की सबसे ऊंची रिहायशी इमारतों में से एक है. बीबीसी की टीम एक ऐसे परिवार से मिली जो इस इमारत में 74वीं मंजिल पर रहता है.

लेकिन इस परिवार के कुछ दोस्त अब उनसे मिलने नहीं आते क्योंकि उन्हें ऊंचाई से डर लगता है. जहां तक इस परिवार का सवाल है, वे इस ऊंचाई को छोड़कर नहीं जाना चाहता.

परिवार के सबसे छोटे सदस्य गिडियन कहते हैं, "यहां रहना एक अदभुत अहसास है. सुबह उठते आप अपनी बड़ी सी खिड़की से सारे शहर का नज़ारा देखते हैं. ये बहुत 'कूल' घर है. "

ऊंचाई के हमसफर

गगनचुंबी इमारत को बनाने का अहसास

लंदन की लीडनहॉल बिल्डिंग ब्रितानी राजधानी लंदन में बनाई जा रही गगनचुंबी इमारतों में से एक है. बीबीसी न्यूज टीम ने इसके निर्माण से जुड़े लोगों से मुलाकात की और जाना कि इससे किस तरह जोखिम जुड़े होते हैं और इतनी ऊंचाई पर काम करना किस तरह का अहसास होता है.

रिचर्ड बिशप इस इमारत में फ़ोरमैन का काम करते हैं.

बिशप कहते हैं, " मैं यहां सुबह साढ़े छह बजे आता हूं. सात बजे काम शुरू करते हैं और शाम छह बजे तक जारी रखते हैं. ज़िंदगी ठीक ही है. हम ख़ूब मज़ाक करते हैं और हंसते रहते हैं. "

आसमानी गलियां

ऊंची इमारतों में रहने वाले और वहां काम करने वाले लोगों की बढ़ती संख्या को देखते हुए आर्किटेक्ट को इस बात की चिंता सताने लगी है कि वहां कैसे लोगों को सामाजिक मेलमिलाप के अलावा कसरत करने और ताजी हवा खाने के लिए क्षैतिज स्थान मुहैया कराएं.

सिंगापुर में पिनाकल@डक्सटन सात ऊंची इमारतों का एक रिहायशी परिसर है जो आसमानी बगीचों से जुड़ी हैं.

इस इमारम को डिज़ाइन करने वालों में से एक खू पेंग बेंग कहते हैं, "हमारा मकसद आसमान में कुछ और जगह मुहैया करवाना था. शुरु में हमें लगा था कि यहां काफ़ी भीड़ रहने वाली है लेकिन ऐसा तो बिल्कुल नहीं हुआ. यहां पंछी आते हैं लेकिन लोग उतने नहीं. "

विवाद भी

पिछले एक दशक में सबसे ज्यादा गगनचंबी इमारतें चीन में बनी हैं और वहां के 33 शहरों में 200 से ज्यादा ऐसी इमारते हैं जिनकी ऊंचाई 200 मीटर से ज्यादा है. लेकिन इसे लेकर खासा विवाद भी रहा है.

चीन के शुज़ो शहर में अलग सी दिखने वाली एक इमारत पर वहां के एक आम शहरी कहते हैं, "हम इन्हे एक भीमकाय पतलून की तरह देखते हैं. "

और नीचे जाना?

गगनचुंबी इमारतों के लिफ्ट सिस्टम को जांचने का पारंपरिक तरीका इसके लिए एक ऊंची सी इमारत बनाना है, लेकिन फिनलैंड में एक लिफ्ट निर्माता कंपनी अलग ही तरीका अपना रही है.

उसने राजधानी हेल्सिंकी में एक ऐसी खान को दुनिया का सबसे बड़ा लिफ्ट टेस्टिंग केंद्र बनाया है, जिसे अब इस्तेमाल नहीं हो रहा है. वो वहां जमीन से 350 मीटर नीचे तक लिफ्ट का परीक्षण कर रही है.

इस कंपनी के एक टेक्नोलॉजी अधिकारी कहते हैं कि बिना लिफ़्ट के गगनचुंबी इमारतों की कल्पना भी नहीं की जा सकती है.

संबंधित समाचार