सैटेलाइट के बहाने मिसाइल परीक्षण की तैयारी तो नहीं?

  • 3 दिसंबर 2012
उत्तर कोरिया में मिसाइल परीक्षण की तैयारी

दक्षिण कोरिया की समाचार एजेंसी योनहाप ने खबर दी है कि उत्तर कोरिया अपने इलाके सोहे में इस महीने रॉकेट प्रक्षेप की तैयारियों में जुटा है. इसके लिए वहां रॉकेट लगाया जा रहा है.

उत्तर कोरियाई मीडिया के मुताबिक सरकार का इरादा आने वाले दिनों में अंतरिक्ष में अपना सैटेलाइट भेजने का है और 10 से 22 दिसंबर के बीच सैटेलाइट भेजने की कोशिश हो सकती है.

माना जा रहा है कि इससे पहले वैज्ञानिकों को तीन चरणों वाली रॉकेट को सोहे प्रक्षेपण केंद्र में स्थापित करने में कई दिन लगेंगे. यह प्रक्षेपण केंद्र उत्तर प्योंगेन प्रांत में स्थित है.

लेकिन अमरीका और उसके सहयोगी देशों का कहना है कि सैटेलाइट तो बहाना है, दरअसल उत्तर कोरिया लंबी दूरी तक मार करने वाली तकनीक के इस्तेमाल की दिशा में कदम बढ़ा रहा है.

शांति भंग होने का ख़तरा

उत्तर कोरियाई सरकार ने यह कदम तब उठाया है कि जब उसके सबसे बड़े सहयोगी चीन ने भी उसकी योजना पर सवाल उठाए हैं.

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, “सभी संबद्ध पक्षों को इस बात पर ध्यान देना होगा जिससे कोरियाई प्रायद्वीप में शांति और स्थिरता बनी रहे. लेकिन सभी पक्षों को इस मुद्दे पर नरमी से काम लेना होगा.”

हालांकि चीन ने कहा है कि बाहरी अंतरिक्ष का शांतिपूर्ण इस्तेमाल करना उत्तर कोरिया का अधिकार है, लेकिन उसे बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण पर संयुक्त राष्ट्र की लगाई पाबंदी का पालन भी करना चाहिए.

दक्षिण कोरियाई समाचार एजेंसी योनहेप ने एक सरकारी सूत्र के हवाले से कहा है, “उत्तर कोरिया ने लॉन्चिंग पैड पर पहले चरण के रॉकेट को स्थापित कर दिया है. इससे जाहिर होता है कि वह लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों के प्रक्षेपण की तैयारी में जुटा है.”

दक्षिण कोरियाई गुप्तचर और सैन्य अधिकारियों के मुताबिक अगले तीन से चार दिनों में उत्तर कोरिया तीन चरणों के सभी रॉकेटों को स्थापित कर लेगा.

वहीं दक्षिण कोरियाई राजधानी सोल में मौजूद बीबीसी संवाददाता लूसी विलियमसन ने बताया है कि उत्तर कोरियाई सरकारी मीडिया इस पूरी कवायद को शांति के उद्देश्यों के लिए ज़रूरी कदम बता रहा है.

क्या सफल होगा प्रक्षेपण?

दूसरी ओर रूस ने भी उत्तर कोरिया के कदम पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि यह संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद की पाबंदी का उल्लंघन होगा.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक रूसी विदेश मंत्री ने अपने इस मुद्दे पर बयान जारी किया है, “हम उत्तर कोरियाई सरकार से अपील करते हैं कि वह अपने फ़ैसले पर फिर से विचार करे.”

किम जोंग उन के नेतृत्व में यह उत्तर कोरिया का दूसरा प्रक्षेपण होगा. उन्होंने एक साल पहले अपने पिता किम जॉंग इल के निधन के बाद सत्ता संभाली थी.

दक्षिण कोरिया में 19 दिसंबर को राष्ट्रपति पद का चुनाव होना है.

उत्तर कोरिया ने अपने पडो़सी देशों को इस बात की सूचना दी है कि इस रॉकेट का प्रक्षेपण का मार्ग भी पिछली प्रक्षेपण जैसा होगा.

अप्रैल में उन्हा-3 रॉकेट का परीक्षण विफल हो गया था. तब उसकी उड़ान का मार्ग चीन और कोरियाई प्रायद्वीप ही था. तब यह रॉकेट ओकिनावा के पास समुद्र में घिर गया था.

दूसरे चरण में भी रॉकेट फिलीपींस के समुद्री तटों पर गिर गया था.

दरअसल 'उन्हा' कोरियाई शब्द है जिसका मतलब आकाशगंगा होता है. उत्तर कोरिया ने अपने टेपोडोंग-2 मिसाइल सीरीज का नाम उन्हा रखा है, जो दो हजार दो सौ किलोमीटर की दूरी तक मार कर सकता है.

अब तक इस मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण नहीं हुआ है.

संबंधित समाचार