जब भेजा गया वो पहला 'एसएमएस'

 सोमवार, 3 दिसंबर, 2012 को 10:48 IST तक के समाचार

एसएमएस का विचार 1984 में मैटी मैक्कोनेन ने रखा था.

आज मोबाइल एसएमएस सेवा की 20वीं सालगिरह है. तीन दिसंबर 1992 को ही ब्रिटेन में एक इंजीनियर ने अपने निजी कम्प्यूटर से वोडाफ़ोन नेटवर्क का इस्तेमाल करते हुए मोबाइल पर एक मैसेज भेजा था जिसमें लिखा था "मैरी क्रिसमस" यानि क्रिसमस की शुभकामनाएं.

लेकिन एसएमएस भेजने का विचार सबसे पहले 1984 में मैटी मैक्कोनेन के मन में आया था. फ़िनलैंड के इस पूर्व नौकरशाह ने एक दूरसंचार सम्मेलन के दौरान मोबाइल एसएमएस का विचार सामने रखा था.

मैटी को एसएमएस का जनक माना जाता है. हालांकि वो इस उपाधि से उतना इत्तेफ़ाक़ नहीं रखते क्योंकि उनका मानना है कि इस तकनीक को विकसित करनेवालों का श्रेय उनसे ज़्यादा है.

यही वजह है कि वो इस विषय पर इंटरव्यू देना भी पसंद नहीं करते. लेकिन बीबीसी की तकनीकी टीम के साथ एसएमएस के ज़रिए एक इंटरव्यू के लिए वो तैयार हो गए.

"एक अनुमान के मुताबिक पिछले साल क़रीब आठ खरब एसएमएस किए गए. 20 साल पहले आपको क्या लगता था कि एसएमएस कितना लोकप्रिय हो पाएगा या फिर इसका किन बातों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा."

बीबीसी

"20 वर्ष पहले मैं एसएमएस को एक अलग विषय के रूप में नहीं देखता था. ये तो मोबाइल संचार के क्षेत्र में जो क्रांति हुई थी उसी की एक विशेषता थी. ये त्वरित कारोबारी ज़रूरतों के लिए बहुत उपयोगी थी."

मैटी मैक्कोनेन

"आपको इस विचार के लिए कोई पैसे नहीं मिले क्योंकि आपने इसका पेटेंट नहीं करवाया था. क्या आज आपको इसका पक्षतावा है या फिर खुश हैं कि ये कितना क़ामयाब रहा?"

बीबीसी

"मुझे नहीं लगता कि मैंने कोई पेटेंट कराने योग्य अविष्कार किया था. हां ये ज़रूर है कि मैं उन कुछ लोगों में से एक था जिन्होंने इसके विचार और ज़रूरत को अच्छी तरह समझ लिया था. मैं खुश हूं कि ये काम जीएसएम (ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल) के एक अंग के रूप में हुआ."

मैटी मैक्कोनेन

"आपको "एसएमएस का अनिच्छुक पिता" कहा जाता है. आपकी पहचान करने के लिए एक अखबार को काफ़ी मशक्क़त करनी पड़ी. आप अपनी इस उपलब्धि को लेकर इतने शांत क्यों रहे?"

बीबीसी

"मैं एसएमएस को अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं मानता बल्कि मानता हूं कि ये कई लोगों के सामूहिक प्रयास से संभव हुआ है. "

मैटी मैक्कोनेन

"क्या आप संकेतात्मक मैसेज में संवाद करते हैं?"

बीबीसी

"नहीं. मैं सही भाषा में संवाद करने में यक़ीन रखता हूं."

मैटी मैक्कोनेन

"जो लोग संकेतात्मक भाषा में मैसेज करते हैं क्या आप उनको नापसंद करते हैं?"

बीबीसी

"नहीं मैं उनको नापसंद नहीं करता. असल में एसएमएस को एक अलग भाषा के विकास के एक साधन के रूप में भी देखा जा सकता है जिसमें ज्यादा संकेत और कम अक्षर हों."

मैटी मैक्कोनेन

"आपको कीपैड पर टाइप करना पसंद है या टचस्क्रीन पर और आप कितने तेज़ हैं उसमें?"

बीबीसी

"मुझे टच स्क्रीन बहुत पसंद है. मैं बहुत जल्दी नहीं सोचता इसलिए कई बार लिखकर उसे संपादित करता हूं. "

मैटी मैक्कोनेन

"क्या एसएमएस और 20 सालों तक जीवित रहेगा या फिर फ़ेसबुक, स्काइप और दूसरे त्वरित मैसेजिंग सिस्टम उसका स्थान ले लेंगे.?"

बीबीसी

"बीस साल तो लंबा अरसा है. मुझे लगता है कि सरल और विश्वसनीय संदेश माध्यम के रूप में एसएमएस हमेशा बना रहेगा. हां ये ज़रूर है कि इसके स्वरूप में थोड़ा बहुत बदलाव आ सकता है. हो सकता है कि हमें इसके लिए पैसे न देने पड़ें."

मैटी मैक्कोनेन

"आपके विचार पेश करने और पहला एसएमएस के आने के बीच आठ साल का समय लगा. क्या आपको हैरानी हुई थी कि इसमें इतना लंबा समय लगा?"

बीबीसी

"नहीं. क्योंकि मैं खुद को एक ग्राहक के रूप में देख रहा था जिसने एक ज़रूरत महसूस की थी. मैं इस बात से खुश था कि जीएसएम तकनीक पर काम कर रही टीम एसएमएस को हक़ीक़त बनाने पर काम कर रही थी. इस सेवा की असल शुरुआत तो तब हुई जब नोकिया ने 1994 में पहला ऐसा फोन बाज़ार में उतारा जिससे मैसेज लिखना आसान हो गया."

मैटी मैक्कोनेन

"क्या भविष्य के लिए आपके पास और भी कोई बड़ा विचार है?"

बीबीसी

"नहीं, लेकिन अगर मोबाइल की सामग्री मेरे चश्मे पर नज़र आने लगे तो बहुत अच्छा होगा. शायद कोई इस तकनीक को विकसित करने पर काम कर भी रहा है?"

मैटी मैक्कोनेन

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