सबूत पर्याप्त हों तो हाफिज़ सईद के ख़िलाफ़ कार्रवाई

 रविवार, 2 दिसंबर, 2012 को 20:09 IST तक के समाचार
हिना रब्बानी

हिना रब्बानी का कहना है कि सबूत मज़बूत होने चाहिए

पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खर ने कहा है कि अगर मुंबई हमलों के प्रमुख अभियुक्त हाफ़िज़ सईद के ख़िलाफ़ सबूत हों तो उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जा सकती है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार खर ने पाकिस्तान के एक टीवी चैनल से बात करते हुए कहा, ‘‘ हाफ़िज़ सईद कस्टडी में थे और उनके ख़िलाफ़ जो सबूत थे वो अदालत में ठहरे नहीं. हम तो अभी भी कह रहे हैं कि अगर कोई ऐसा सबूत है जो अदालत में ठहर सकता हो तो हम कार्रवाई करेंगे.’’

सईद पूर्व में लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख रह चुके हैं और इस समय वो जमात-उद-दावा के प्रमुख हैं.

यह पूछे जाने पर अगर भारत ने हाफ़िज़ सईद ख़िलाफ़ सबूत दिए तो, खर का कहना था, ‘‘ बिल्कुल, हम कार्रवाई करेंगे. वो पहले भी हिरासत में थे. उनके ख़िलाफ़ सबूत पर्याप्त नहीं थे तो उन्हें इसी कारण हिरासत से छोड़ना पड़ा था.’’

हाफ़िज सईद को लाहौर हाई कोर्ट के आदेश पर हिरासत से रिहा किया गया था.

हिना रब्बानी

"पाकिस्तान की सरकार ने रिश्तों को सुधारने की दिशा में बहुत काम किया है. हमने विश्वास बढ़ाया है.हमने एक नीतिगत फ़ैसला लिया है जो पिछले 40 साल में कोई नहीं ले पाया कि व्यापार के रिश्तों को सामान्य किया जाए"

अमरीका ने हाफ़िज सईद पर दस लाख डॉलर का ईनाम रखा है लेकिन सईद लाहौर में आराम से रहते हैं और वो पिछले कुछ समय में भारत और अमरीका के ख़िलाफ़ लगातार विरोध प्रदर्शन आयोजित करते रहे हैं.

इंटरव्यू के दौरान हिना रब्बानी ने कहा कि मुंबई हमलों के बाद भारत के साथ संबंध बहुत ही ख़राब हो गए थे.

उन्होंने माना कि भारत और पाकिस्तान कठिन दौर से गुज़रे हैं.

उनका कहना था, ‘‘पाकिस्तान की सरकार ने रिश्तों को सुधारने की दिशा में बहुत काम किया है. हमने विश्वास बढ़ाया है.हमने एक नीतिगत फ़ैसला लिया है जो पिछले 40 साल में कोई नहीं ले पाया कि व्यापार के रिश्तों को सामान्य किया जाए.’’

उनका कहना था कि व्यापार संबंध सामान्य होना विश्वास बढ़ाने की दिशा में बहुत बड़ा कदम है.

उन्होंने बताया कि भारत और पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्यता के लिए एक दूसरे की मदद की है.

उनका कहना था कि अगर भारत और पाकिस्तान एक दूसरे पर थोड़ा सा भरोसा करना शुरु करें तो एक शुरुआत हो सकती है क्योंकि दोनों के बीच पूरा यकीन होने में समय लगेगा.

उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को कम जटिल मुद्दों पर बातचीत करनी चाहिए कश्मीर पर बातचीत से पहले.

उन्होंने सवालिया लहजे़ में कहा, ‘‘हम सैन्य ताकत से 60 साल में कश्मीर का मुद्दा नहीं सुलझा पाए.क्या हम शांति को एक मौका नहीं दे सकते और क्या हम ऐसी परिस्थितियां, ऐसा माहौल और ऐसे मौके नहीं बना सकते कि हम अपने बीच के सारे मुद्दे वार्ता की मेज़ पर आकर सुलझाएं.’’

भारतीय प्रधानमंत्री को पाकिस्तान बुलाए जाने के बारे में हिना रब्बानी ने कहा कि भारतीय पक्ष लगातार कहता रहा है कि मनमोहन सिंह पाकिस्तान आना चाहते हैं निजी यात्रा पर.

उनका कहना था कि पाकिस्तान को बचाव की मुद्रा में नहीं होना चाहिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को आमंत्रित करने में.

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