जब मैंने खेला कौन बनेगा करोड़पति

  • 1 सितंबर 2013
 अमिताभ बच्चन के साथ मधु पाल

केबीसी यानी कि "कौन बनेगा करोडपति" शो वर्ष 2000 में शुरू हुआ था.

इस शो के ज़रिए अमिताभ बच्चन ने छोटे पर्दे पर अपना पहला बड़ा क़दम रखा था.

जब ये शो शुरू हुआ तो ख़ुद अमिताभ बच्चन को भी उम्मीद नहीं थी कि ये शो इतना लोकप्रिय हो जाएगा और 2000 में शुरू हुआ यह शो 2013 तक भी क़ायम रहेगा. इस शो ने जाने कितने लोगों के सपनों को पूरा किया. हर आम आदमी की तरह मेरा भी सपना था कि मैं भी कौन बनेगा करोड़पति में हिस्सा लूँ. ये कभी मुमकिन नहीं हो पाया लेकिन कुछ दिन पहले कुछ ऐसा हुआ जिसकी कल्पना मैंने कभी नहीं की थी.

मुझे कौन बनेगा करोड़पति शो से एक ई-मेल आया जिसमें लिखा था, "भाग लीजिए केबीसी में और पाएं मौक़ा हॉट सीट पर अमिताभ बच्चन के साथ इस गेम की शुरुआत करने का." केबीसी -सात, सितंबर में शुरू हो रहा है. अमिताभ चाहते थे कि इस बार वो सबसे पहले पत्रकारों के साथ केबीसी खेलें और बाद में आम जनता के साथ.

केबीसी का फ़ॉर्म मुंबई और दूसरे शहरों के पत्रकार, सबको भेजा गया था. मेरे पास भी फ़ॉर्म आया. सोचा क्यों ना एक बार क़िस्मत आज़मा ली जाए. मैंने उस फ़ॉर्म को भर दिया. उस फ़ॉर्म में कुछ कठिन सवाल भी थे जिसके जवाब हमें जल्द से जल्द देने थे. जवाब दिया और भेज दिया. साथ ही फिर से व्यस्त हो गई अपने काम में. अगले दिन सुबह फ़ोन की घंटी बजी. केबीसी वालों की तरफ़ से फ़ोन आया था.

'केबीसी से फ़ोन'

Image caption प्रतियोगिता में केवल दस ही पत्रकारों को मौका मिला

उन्होंने कहा, "100 से भी अधिक पत्रकारों ने इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया लेकिन मौक़ा मिला केवल दस ही पत्रकारों को अमिताभ बच्चन के साथ फ़ास्टेस्ट फ़िंगर्स फ़र्स्ट खेलने का. उन दस पत्रकारों में से एक नाम बीबीसी की पत्रकार मधु पाल जी आपका भी है. कृपया आप चार बजे पहुँच जाएं उस जगह जहाँ आप अमिताभ बच्चन के साथ खेलेंगी कौन बनेगा करोड़पति !"

ये सुनते ही मैं बेहद ख़ुश हो गई.

इससे पहले अमिताभ बच्चन से मैं जितनी बार भी मिली एक पत्रकार की हैसियत से मिली लेकिन इस बार उनके साथ एक प्रतियोगी के तौर पर मिलने वाली थी. लेकिन जितनी ख़ुशी थी उससे भी ज़्यादा घबराहट भी थी. ठीक चार बजे उस होटल में पहुँच गई जहाँ हमें बुलाया गया था. वहां पहुंची तो देखा कि अमिताभ बच्चन काफ़ी पाबंद हैं अपने समय के. वो हमसे पहले ही ढाई बजे वहां पहुँच गए थे और केबीसी का अपना अभ्यास कर रहे थे.

'अजीब सी घबराहट'

हम 10 पत्रकारों को एक दूसरे से मिलाया गया. हमसे कहा गया कि आप थोड़ा इंतज़ार कीजिए, थोड़ी देर में आपको खेल के नियम सिखाए जाएंगे. एक प्रतियोगी जब केबीसी के सेट पर जाता है तो उसके ज़ेहन में बहुत कुछ चलता है. एक अजीब सी घबराहट, एक अजीब सा उतावलापन रहता है. वही सब मैं अपने साथ भी महसूस कर रही थी.

मुझे इंतज़ार था अमिताभ बच्चन से मिलने का. लेकिन उनसे मिलना इतना आसान नहीं था. हमें उसके लिए लंबा इंतज़ार करना पड़ा. जब मैं इंतज़ार करते हुए थक गई तब मैंने केबीसी से जुड़े लोगों से पूछा, "कितना वक़्त और है जनाब ? दो घंटे हो गए हैं इंतज़ार करते." उस व्यक्ति ने मुस्कुरा कर जवाब दिया, "अभी तो केवल दो घंटे हुए हैं मैडम. केबीसी में भाग लेने वाले प्रतियोगियों को तो आठ से नौ घंटे भी इंतज़ार करना पड़ता है."

ये बात सुनते ही मुझे उन सभी प्रतियोगियों का ख्याल आ गया जो देश के कोने-कोने से अपना काम छोड़ कर यहाँ बहुत सी उम्मीद और सपनों के साथ आते हैं और फिर आठ से नौ घंटे का इंतज़ार करते हैं. केवल इस उम्मीद में कि हमें मौक़ा मिलने वाला है बॉलीवुड के सबसे बड़े सुपरस्टार अमिताभ बच्चन के साथ केबीसी खेलने का.

इंतज़ार और ट्रेनिंग

यह सब सोचने और इंतज़ार करने के पूरे ढाई घंटे बाद हमारी ट्रेनिंग शुरू हुई. मुझे लगा कि ट्रेनिंग में हमें सिखाया जाएगा कि कैसे खेलते हैं फ़ास्टेस्ट फ़िंगर्स फ़र्स्ट राउंड. लेकिन जब हम अंदर गए हमें सिखाया गया कि स्टेज पर कैसे जाना है, कैसे अमिताभ से मिलना है, कैसे अपनी जगह पर जाके खड़ा रहना है. इस बात पर सभी पत्रकारों को थोड़ी हँसी आई कि ढाई घंटे इंतज़ार के बाद हमें ये सिखाया जा रहा है ! इस पर केबीसी में काम करने वाले एक व्यक्ति ने कहा कि आम जनता को भी यही सब सिखाया जाता है.

फिर हमें सिखाया गया फ़ास्टेस्ट फ़िंगर्स फ़र्स्ट राउंड. जब ये ट्रेनिंग चल रही थी तो मुझे अपने स्कूल के दिनों की याद आ गई. वो व्यक्ति मुझे अपने स्कूल के मास्टर जैसा ही लग रहा था. ये सब देख कर थोड़ा बोर होने लगे. ट्रेनिंग ख़त्म हुई और हम बाहर आ गए. अभी हमें और भी इंतज़ार करना था. ट्रेनिंग को मिला कर पूरे पाँच घंटे हो गए थे. इतना लंबा इंतज़ार! एक बार तो मुझे ये भी लगा कि मैं यहाँ आई ही क्यों.

सात बजे के दिए हुए टाइम पर शुरू ना होकर केबीसी का खेल नौ बजे शुरू हुआ. अब अमिताभ बच्चन से मिलने का समय आ चुका था. ट्रेंनिंग के समय हम दस पत्रकार थे. लेकिन अब उस होटल का वह हॉल लोगों की भीड़ से खचाखच भर चुका था. वो हॉल इतना भरा हुआ था कि कुछ लोगों को बैठने के लिए कुर्सी तक नहीं मिल रही थी. सभी चैनल के कैमरे वहाँ लगे हुए थे. केबीसी प्रोडक्शन हाउस के कैमरा चारों तरफ़ लगे हुए थे. मेरे दिल की धड़कनें और तेज़ बढ़ने लगीं.

हर बार कैमरे के पीछे रही हूं और उस दिन सभी कैमरों की नज़रें हम पर टिकी थी. स्टेज पर एक होस्ट आया जिसने अमिताभ बच्चन जी की उपलब्धियों के बारे में लंबा चौड़ा भाषण दिया.

'अमिताभ बच्चन की बारी'

देखते ही देखते उस हॉल के लाइट और तेज़ हो गईं, संगीत भी तेज़ हो गया. हॉल में तालियों की गूँज की लहर दौड़ पड़ी. तभी देखा कि सदी के महानायक कहे जाने वाले अमिताभ बच्चन अपने ख़ास अंदाज़ के साथ चलते हुए वहां पहुंचे.

पहुँचते ही उन्होंने कहा, "नमस्कार देवियों और सज्जनों. मैं अमिताभ बच्चन आप सभी का स्वागत करता हूँ इस कौन बनेगा करोड़पति के सीज़न सात में. जैसा कि आप सभी जानते हैं कि छह सितंबर को शुरू होने जा रहा है कौन बनेगा करोड़पति का सीज़न सात. मैं इस शो को लेकर बहुत ज़्यादा ही उत्साहित हूँ. आज इस मंच पर मुझे मिला है मौक़ा उन दस पत्रकारों के साथ कौन बनेगा करोड़पति खेलने का जो आप लोगों के ही साथी हैं. ये पत्रकार हमेशा मुझसे ऐसे-ऐसे सवाल पूछते हैं जिनका जवाब देना कभी-कभार मेरे लिए मुश्किल हो जाता है. मैं कुछ ज़्यादा ही उत्साहित हूँ क्योंकि इस बार मेरी बारी है. अब मैं एक एक कर नाम बुलाने वाला हूँ क्या आप सभी तैयार हैं जो हॉल में उपस्थित हैं?"

ये सुनते ही चारों तरफ़ तालियाँ ही तालियाँ बजने लगीं. और शोर मचने लगा. मेरी साँसें बढ़ने लगीं. उस हॉल में एसी होने के बावजूद भी पसीना आने लगा. हाथ पैर एक दम सुन्न से होने लगे और जैसे ही अमिताभ बच्चन ने कहा मैं सबसे पहले बुलाना चाहूँगा मधु पाल को जो बीबीसी में पत्रकार हैं. वो इस मंच पर आएं और अपना स्थान ग्रहण करें.

'सुनहरा सपना'

ये सुनते ही मेरे कानों में बस अमिताभ बच्चन की आवाज़ गूँजने लगी और क़दम बढ़ने लगे स्टेज पर. अमिताभ बच्चन ने ख़ुद हाथ बढ़ाया मुझे स्टेज की तरफ़ ले जाने के लिए. वो पल मेरी आँखों में आज भी सुनहरे सपने की तरह क़ैद हो गया है.

उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "आपका स्वागत है इस केबीसी शो में. मैंने उनसे हाथ मिलाते हुए कहा, "धन्यवाद". उनकी आँखों में एक चमक सी थी जो मैंने इससे पहले एक पत्रकार के रूप में कभी नहीं देखी. जब एक प्रतियोगी बनकर उनसे मिली तो देखा कितना स्नेह और सम्मान रहता है उनके दिल में एक प्रतियोगी के लिए.

उन्होंने गर्दन झुकाते हुए कहा, "आपको मेरी तरफ़ से शुभकामनाएं."

ये सुनते ही मानों हौसला और बढ़ गया. जितनी भी शिकायत थी खेल शुरू होने से पहले के घंटों इंतज़ार की, वो सब एक क्षण में दूर हो गई . मैं अपने स्थान पर जाकर खड़ी हो गई. फिर एक एक कर बाक़ी सभी अपनी जगह खड़े हो गए. पाँच प्रतियोगी अमिताभ बच्चन के दाएं खड़े थे और पाँच बाएं. फिर शुरू हुई हमारी असली परीक्षा.

'असली परीक्षा'

उन्होंने कहा, "आप सब को दिए जाएंगे 15 सेकेंड. इस समय में आपको सही जवाब देना है. जो सबसे पहले जवाब देगा वो खेलेगा मेरे साथ कौन बनेग करोड़पति." उन्होंने हमसे एक-एक कर सवाल करना शुरू किया. सवाल बहुत आसान थे. उन्हें हमें उनके क्रम से लगाना था. लेकिन मुश्किल था 15 सेकेंड में बहुत तेज़ी से काम करना. वो भी अमिताभ बच्चन जैसी शख्सियत के सामने. लेकिन अफ़सोस. सही जवाब देने के बाद भी मैं अमिताभ बच्चन के साथ केबीसी नहीं खेल पाई.

मुझे ख़ुशी थी की मेरी ही दोस्त ने मुझसे पहले यह राउंड जीत लिया था. उस वक़्त मुझे फ़िल्म थ्री इडियट्स का वो डायलॉग याद आ रहा था जो आर माधवन ने आमिर ख़ान के फ़र्स्ट आने पर कहा था - "ख़ुशी इस बात की है कि मेरा दोस्त जीत गया लेकिन उससे भी ज़्यादा दुःख तब होता है जब आपका दोस्त फ़र्स्ट आता है."

'जमकर खिंचाई'

मानवीय व्यवहार के बारे में सुना था लेकिन अब जाना. मेरा भी कुछ ऐसा ही हाल था. लेकिन तभी अपनी दमदार आवाज़ में अमिताभ बच्चन ने कहा, "आप सभी बहुत अच्छा खेले. आप सभी ने एक अच्छी कोशिश की. ज्ञान हर तरफ़ है. जहाँ से भी मिले ले लीजिए और सीखने की कोई उम्र नहीं है."

उस एक भाग्यशाली पत्रकार को मौक़ा तो मिला अमिताभ बच्चन के साथ हॉट सीट पर बैठने का. अमिताभ बच्चन ने जमकर खिंचाई की उन सवालों पर जिनके जवाब वो पत्रकार नहीं दे पाई.

जब शो ख़त्म होने लगा तो अमिताभ बच्चन ने कहा, "सीखना बंद, तो जीना बंद. इस बात पर हमेशा अमल करेंगे तो आपकी मंज़िल आपको किसी ऊँचाई के शिखर पर ले जाती है."

उनकी यह बात मैं हमेशा याद रखूँगी. आख़िर में यही कहना चाहूँगी कि घर पर बैठ कर टीवी के सामने दूसरों को जज करना आसान है लेकिन उस जगह पर खड़े रहना ही अपने आप में किसी चुनौती से कम नहीं होता है. मेरी तरफ़ से केबीसी सीज़न सात में नज़र आने वाले सभी प्रतियोगियों को बहुत-बहुत शुभकमनाएं.

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