कथित लश्कर चरमपंथी टुंडा गिरफ़्तार

  • 17 अगस्त 2013
Indian Parliamnet, भारतीय संसद
Image caption भारतीय संसद पर हमले के बाद जिन 20 चरमपंथियों के प्रत्यपर्ण की मांग भारत ने पाकिस्तान से की थी उसमें टुंडा भी शामिल थे.

कथित चरमपंथी अब्दुल करीम उर्फ़ टुंडा को दिल्ली पुलिसने गिरफ़्तार कर लिया है.

70 साल के टुंडा को शनिवार को अदालत में पेश कर दिया गया है.

टुंडा की गिरफ़्तारी की पुष्टि दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता राजन भगत ने की है. दिल्ली पुलिस के अनुसार टुंडा के पास से एक पाकिस्तानी पासपोर्ट बरामद किया गया है.

‏शनिवार को दिल्ली पुलिस के विशेष सेल के आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने पत्रकारों को बताया कि टुंडा को 16 अगस्त की शाम तीन बजे भारत-नेपाल सीमा पर गिरफ़्तार किया गया जिसके बाद शनिवार सुबह उन्हें दिल्ली लाया गया और फिर अदालत में पेश किया गया.

उन्होंने बताया कि टुंडा के बारे में दिल्ली पुलिस को केंद्रीय ख़ुफिया एजेंसियों ने जानकारी दी जिसके आधार पर दिल्ली पुलिस ने उसे गिरफ़्तार किया.

राष्ट्रमंडल खेलों से पहले धमाकों की कोशिश

श्रीवास्तव के मुताबिक टुंडा के पास से बरामद पाकिस्तानी पासपोर्ट इस साल जनवरी में जारी किया गया था. ये पासपोर्ट अब्दुल कद्दूस के नाम पर है.

दिल्ली पुलिस के मुताबिक टुंडा 1993 के मुंबई में सिलसिलेवार धमाकों में शामिल थे.

श्रीवास्तव ने बताया, "टुंडा हैदराबाद के सिलसिलेवार बम धमाकों में शामिल था. इसके अलावा 5-6 दिसंबर 1993 में गुलबर्ग, सूरत और लखनऊ में हुए धमाकों में भी उनका हाथ था. दिल्ली के 21 चरमपंथी मामलों में इनका नाम है. इनमें 24 जगहों पर धमाके हुए थे."

एसएन श्रीवास्तव ने भी खुलासा किया कि टुंडा की 2010 के दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों से पहले दिल्ली और आसपास के इलाकों में हमलों की योजना बनाई थी लेकिन सही समय पर उसके साथी पकड़े गए और वो साज़िश सफल नहीं हुई. श्रीवास्तव ने बताया कि इन धमाकों के ठिकानों का पता टुंडा से पूछताछ के बाद चल पाएगा.

हाफ़िज़ सईद और दाऊद से रिश्ते

दिल्ली पुलिस के मुताबिक अब्दुल करीम टुंडा के जमात उद दावा के प्रमुख हाफ़िज़ सईद और गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम से भी करीबी रिश्ते हैं.

भारत में लश्कर के सेल बनाने में टुंडा की अहम भूमिका है और उन्होंने पाकिस्तान और बांग्लादेश में लश्कर के सदस्यों को बम बनाने में प्रशिक्षण दिया.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक सुरक्षाबलों का कहना है कि टुंडा भारत में चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की कार्रवाईयों पर रोशनी डाल सकेगा. उन्हें लश्कर का बम बनाना का एक्सपर्ट माना जाता है.

टुंडा के खिलाफ़ साल 1996 में इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था.

वह उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ियाबाद ज़िले के पिलखुवा के रहने वाले हैं. साल 2001 में भारतीय संसद पर हमले के बाद जिन 20 चरमपंथियों के प्रत्यपर्ण की मांग भारत ने पाकिस्तान से की थी उसमें टुंडा भी शामिल थे. इस सूची में लश्कर के प्रमुख हाफ़िज़ सईद और जैश-ए-मौहम्मद के प्रमुख मौलाना अज़हर मसूद अलवी भी था.

पीटीआई के मुताबिक केंद्रीय जांच ब्यूरो सीबीआई ने सैयद अब्दुल करीम पर भारत के कई हिस्सों में लश्कर के हमले आयोजित करने का आरोप लगाया है.

सूत्रों के मुताबिक हालांकि सैयद अब्दुल करीम या टुंडा साल 1998 के बाद से किसी भी बम हमले को अंजाम देने में सीधे तौर पर नहीं शामिल रहे हैं लेकिन उन्होंने लश्कर की नई पीढ़ी को प्रशिक्षित करने और भारत में संगठन की कार्रवाईयों को आयोजित करने और उनके लिए पैसा जुटाने में भूमिका निभाई है.

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