स्मार्टफ़ोन में जापान से आगे निकला भारत

  • 18 अगस्त 2013
स्मार्टफ़ोन
भारत में स्मार्टफ़ोन का बाज़ार बहुत तेजी़ से बढ़ रहा है

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्मार्टफ़ोन बाज़ार बन गया है और इस स्थान पर आने के लिए उसने जापान को पीछे छोड़ दिया है.

भारतीय बहुत तेज़ी से अपने मोबाइल फ़ोन को स्मार्टफ़ोन में बदल रहे हैं.

आंकड़े बताते हैं कि क़रीब एक करोड़ स्मार्टफ़ोन इस साल की पहली तिमाही में ही ख़रीदे गए हैं.

कम कीमत का बाज़ार

दुनिया भर के मुक़ाबले भारत में स्मार्टफ़ोन ख़रीदने के कारण कुछ अलग हैं.

जैसे कि कम क़ीमत के रोबोट्स बनाने वाले मनीष कुमार बताते हैं कि उन्होंने जो स्मार्टफ़ोन ख़रीदा है उसकी क़ीमत छह हज़ार रुपए से कम है.

वह इससे टेक्स्ट मैसेज करते हैं, फ़ोटो खींचते और मेल करते हैं और अपने उत्पाद के वीडियो को सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर अपडेट करते हैं.

मनीष कहते हैं, "मैं महंगे स्मार्टफ़ोन्स पर हज़ारों रुपए खर्च नहीं कर सकता. उसका फ़ायदा ही क्या है?"

नोकिया आशा
आशा सीरीज़ में नोकिया सस्ते फ़ोन दे रहा है

अपना फ़ोन दिखाते हुए वह कहते हैं, "यह मुझे बहुत सस्ते में मिला है और एक मिनी कंप्यूटर की तरह काम करता है. मैं और मेरे सहकर्मी मुफ़्त मैसेंजर ग्रुप के सदस्य हैं और मुफ़्त में बात करते हैं. जो पुर्ज़े मुझे चाहिए उनकी तस्वीरें खींचकर मैं दुकानदारों को भेज देता हूं वह मुझे पहुंचा देते हैं."

दरअसल मनीष जैसे लोग ही भारत में स्मार्टफ़ोन की बिक्री को रफ़्तार दे रहे हैं.

भारत में बने सस्ते मोबाइल फ़ोन की बढ़ती बिक्री के चलते मोबाइल बाज़ार के नोकिया जैसे पुराने खिलाड़ी भी इंटरनेट चलाने वाले कम क़ीमत के फ़ोन बाज़ार में उतार रहे हैं.

नोकिया के उपाध्यक्ष और महाप्रबंधक पी बालाजी कहते हैं कि बड़ी संख्या में लोग इंटरनेट इस्तेमाल करने के लिए कम क़ीमत के फ़ोन चाहते हैं. यह बहुत बड़ा वर्ग है.

इसलिए हमने कम क़ीमत वर्ग में "आशा" को उतारा है और अच्छा फ़ोन चाहने वालों के लिए "लूमिया" है.

गुंजा़इश

भारत में क़रीब 16.50 करोड़ लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं लेकिन निजी कंप्यूटर और ब्रॉडबैंड की पहुंच कम होने के चलते फ़ोन से इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों की संख्या बहुत ज़्यादा है.

फ़ेसबुक
फ़ेसबुक को लगता है कि भारत उसका सबसे बड़ा बाजा़र हो सकता है.

क़रीब 87% लोग मोबाइल या टैबलेट के माध्यम से इंटरनेट से जुड़ते हैं.

यही वजह है कि फ़ेसबुक जैसी कंपनियां भी अपना ध्यान मोबाइल फ़ोन से जुड़े उत्पादों पर केंद्रित कर रही हैं.

फ़ेसबुक के उपाध्यक्ष वॉन स्मिथ कहते हैं, "भारत को लेकर हम बहुत उत्साहित हैं. हमें लगता है कि निकट भविष्य में भारत हमारा सबसे बड़ा बाज़ार हो सकता है, जो अभी अमरीका है. फ़ेसबुक इस्तेमाल करने वालों की संख्या को देखते हुए लगता है कि भारतीय अमरीकियों से आगे निकल सकते हैं. हमें लगता है कि पहली बार इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले लोग अपने दोस्तों से संपर्क करने के मामले में फ़ेसबुक को ज़्यादा महत्व देते हैं. बस हमें उन्हें इससे परिचित करवाना होगा."

तो स्मार्टफ़ोन बेचने का सीधा फंडा यह है कि वह सस्ता हो और उसमें ढेर सारे फ़ीचर्स हों.

भारत में क़रीब एक अरब लोग टेलीफ़ोन का इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन इनमें से सिर्फ़ 10% ही स्मार्टफ़ोन का इस्तेमाल करते हैं.

इसका मतलब यह है कि अभी इस बाज़ार में बहुत गुंजाइश है.

स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों फ़ोन निर्माताओं की नज़र इस बाज़ार पर है इसलिए उपभोक्ताओं के लिए यह एक अच्छी ख़बर है.

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