वापस लिया 'गीता' पाठ अध्याय

  • 7 अगस्त 2013
शिवराज सिंह चौहान
मध्य प्रदेश सरकार के इस फैसले की आलोचना हो रही थी

मध्य प्रदेश सरकार ने स्कूली किताबों में भगवद् गीता के पाठ को शामिल किए जाने के फ़ैसले को वापस ले लिया है.

राज्य सरकार के इस फ़ैसले के पीछे पाठ्यक्रमों में गीता को शामिल करने को लेकर हो रहे विरोध को कारण माना जा रहा है.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संवाददाताओं से कहा कि सरकार ने इस संबंध में जारी की गई अधिसूचना को वापस ले लिया है.

उन्होंने कहा,''शिक्षा विभाग की ओर से पाठ्यक्रमों में भगवद गीता के अध्यायों को शामिल करने का विरोध करना ठीक नहीं है. जिस अधिसूचना की वजह से विवाद हुआ है. उसे सरकार ने वापस ले लिया है.''

विपक्ष का आरोप

गीता के अध्यायों को उर्दू और अन्य स्कूलों के पाठ्यक्रम में 2013-14 के शैक्षणिक सत्र में शामिल करने के सरकार के फ़ैसले की काफी आलोचना हो रही थी. कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि सरकार कुप्रबंधन के मामलों से ध्यान हटाने के लिए ऐसा कर रही है.

एक अगस्त को जारी अधिसूचना के तहत मध्य प्रदेश सरकार ने कक्षा से आठ तक के हिन्दी और अंग्रेज़ी विषय की पुस्तक में गीता पर आधारित एक-एक कहानियाँ शामिल करने का फ़ैसला किया था.

वहीं इस तरह की कहानियां कक्षा एक और दो के उर्दू के पाठ्यक्रम में भी शामिल की जानी थीं.

सरकार के इस फ़ैसले की आलोचना करते हुए कांग्रेस ने इसे राष्ट्रीय स्वयं सेवक (आरएसएस) के दबाव में लिया गया फ़ैसला बताया था. उसका कहना था कि आने वाले चुनाव में फ़ायदा लेने के लिए यह समाज को बांटने की कोशिश है.

अधिसूचना वापस लेने के फ़ैसले का मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य आरिफ़ मसूद ने स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि अधिसूचना संविधान की भावना के खिलाफ थी.

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