ब्रिटेन से भारत, 7600 किलोमीटर पैदल यात्रा

  • 7 अगस्त 2013

पैदल चलकर आप कितनी दूरी तय करना चाहेंगे. एक किलोमीटर, ज़्यादा से ज़्यादा पांच किलोमीटर. लेकिन बात जब हज़ारों किलोमीटर की हो तो आप शायद पैदल चलने का ख़्याल दिल से निकाल देंगे.

लेकिन ब्रिटेन में बसे भारतीय मूल के तारा सिंह बरियाना के मन में ये ख्याल आता रहता था कि क्यों ना पैदल ब्रिटेन से भारत की दूरी तय की जाए.

जब भी ये सवाल उनके मन में उभरता, उन्हें बेचैन कर देता. वे सोचते कि क्या पैदल, बिना किसी गाड़ी के, बिना किसी सवारी के वे भारत पहुंच सकते हैं या नहीं. कोशिश करने पर नतीजा क्या होगा. हो पाएगा या नहीं हो पाएगा?

मन के अंदर चल रही इस उथल पुथल को देखते हुए उन्होंने इसकी तैयारी शुरू कर दी. जूडो, व्यायाम और मैराथन दौड़ में दिलचस्पी रखने वाले तारा सिंह बरियाना ने तीन साल तक की ट्रेनिंग के बाद ख़ुद को इसके लिए तैयार कर लिया-ग्रेट ब्रिटेन से भारत की पैदल यात्रा के लिए.

हज़ारों मील का सफ़र

ग्रेट ब्रिटेन से भारत के बीच की दूरी करीब 4766 मील है. यानी 7600 किलोमीटर से भी ज़्यादा. इस रास्ते में बर्फीली पहाड़ियां भी हैं और रेगिस्तान भी.

(रोजाना 161 किलोमीटर साइकिल चलाने वाला शख़्स)

लेकिन तारा सिंह ने आख़िरकार 25 अप्रैल, 1996 को ग्रेट ब्रिटेन के पॉलसल से भारत के मानों मजारा गांव का रूख कर लिया. 48-49 साल की उम्र हो चुकी थी, लेकिन हौसला इतिहास बनाने का था.

ग्रेट ब्रिटेन से वे सबसे पहले फ़्रांस पहुंचे. फ़्रांस के बाद उन्होंने इटली की दूरी को पार किया. फिर ग्रीस उसके बाद तु्र्की. इसके बाद ईरान. ईरान से बलूचिस्तान पहुंचे. अपने इस सफ़र के बारे में बताते हुए तारा सिंह बताते हैं, “हमने सभी मुल्क का नक्शा ले लिया था. हर मुल्क के नक्शे से मैं पंजाब के नक्शे तक एक रस्सी रख देता था और उसी सीध पर मिले रास्ते पर चल पड़ता.”

इस सफ़र के दौरान उनके पास बस एक बैग था. उस बैग में हर जरूरी सामान था. तारा सिंह बताते हैं, “टैंट, स्टोव, स्लीपिंग बैग, नक्शा, कंपास, कपड़े और इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसलेटर ये सब मेरे पास था.”

फ़ोन और चिट्ठियों का सहारा

इस सफ़र के दौरान उनके साथ मुश्किलें भी ख़ूब आईं लेकिन तारा सिंह चलते रहे. हां इस दौरान घर वालों से फ़ोन पर संपर्क भी बना रहा. वे बताते हैं, “मेरा जब भी मन करता, मैं लोगों से फ़ोन पर बात कर लेता. लेकिन ग्रीस तक पहुंचने के बाद मुझे लगने लगा कि मेरा बहुत सारा पैसा तो फ़ोन पर ही खर्च हो रहा है. ऐसे में मैं हर देश से अपने घर वालों को चिट्ठियां लिखने लगा.”

बलूचिस्तान के बाद उनका इरादा अफ़गानिस्तान के रास्ते भारत पहुंचना था. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. तारा सिंह बरियाना ने बीबीसी हिंदी से बताया, “अफ़गानिस्तान में हालात अच्छे नहीं थे, इसलिए मुझे पाकिस्तान के रास्ते सफ़र करना पड़ा. मैं कह सकता हूं कि मैं ने पाकिस्तान को पूरा का पूरा पार किया.”

आख़िर में तारा सिंह 19 महीने के लंबे अंतराल के बाद ग्रेट ब्रिटेन से भारत पहुंचने में कामयाब हो गए. वे अपने घर पहुंचे.

'ये नशा से कम नहीं'

अपने मकसद में कामयाब होने के बाद घर पहुंचने पर उन्हें कैसा महसूस हुआ. ये सवाल पूछे जाने पर तारा सिंह ने बताया, “मैं सोच रहा था, इससे क्या हासिल हुआ. लेकिन मुझे लगा कि मैंने सोचा और इसे पूरा कर लिया. जब किसी को कोई नशा होता है तो उसे पूरा करने का मतलब क्या होता है. ये मैं जान गया हूं.”

(आसमान से गिरे, पर सलामत रहे)

तारा सिंह के पास इस सफ़र से जु़ड़े सारे सामान आज भी मौजूद हैं. वे अपने से मिलने वालों को इसे बड़े गर्व से दिखाते हैं.

तारा सिंह की उम्र अब 65-66 साल की हो चुकी है. लेकिन अब भी उनके मन में अपने इस कारनामे को दोहराने की है. वे कहते हैं, “मेरी उम्र तो बढ़ गई है लेकिन मेरे मन में ये विचार आता है कि इसे एक बार और करना चाहिए, लेकिन इस बार मैं कोई गाड़ी यानी मशीन का सहारा लेना पसंद करूंगा.”

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