राजस्थान में अब किन्नरों को भी मिलेगी पेंशन

  • 18 मई 2013
किन्नर
राजस्थान में किन्नरों को पांच सौ रुपए पेंशन दी जाएगी.

पहले वो ना इधर शुमार थे, न उधर की गिनती में उनका ज़िक्र होता था. अब नए सरकारी आदेश के मुताबिक राजस्थान में किन्नरों को पेंशनर का दर्जा मिल गया है.

राज्य सरकार ने राजस्थान में हर किन्नर को प्रति माह पांच सौ रुपए पेंशन देने का ऐलान किया है. किन्नरों ने सरकारी फरमान का स्वागत तो किया है मगर कहा है कि ये रकम कम है.

राज्य के सामाजिक अधिकारिता मंत्री अशोक बैरवा ने बीबीसी को बताया कि इस बारे में सरकार ने आदेश जारी कर दिए हैं. ये फैसला मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में जयपुर में हुई एक बैठक में लिया गया.

राज्य मंत्री बैरवा के अनुसार राज्य में करीब दस हजार किन्नर हैं. इससे पहले सरकार नाटे कद के लोगो पर मेहरबान हुई और तीन फीट छह इंच तक लंबाई वाले लोगों के लिए पेंशन मंजूर कर दी.

राज्य मंत्री बैरवा ने कहा किन्नरों के लिए जीवन बहुत मुश्किल है. उनका कहना था, ''उनके पास आजीविका का स्थाई आधार नहीं है, लिहाजा सरकार ने उनके लिए पेंशन योजना शुरू की है.''

आजीविका

किन्नर अभी शादी समारोह और जन्मोत्सव पर नाच गा कर नज़राने से गुज़र बसर करते हैं. किसी के लिए वो कौतुहल का विषय हैं, कोई उन्हें हिकारत से देखता है, तो चंद ऐसे भी हैं जो उनकी हालत पर तरस खाते हैं.

भारत में राजस्थान का रावतभाटा परमाणु शक्ति के केंद्र के रूप में जाना जाता है. लेकिन रावतभाटा की नगरपालिका किन्नरों की राजनेतिक शक्ति को याद दिलाती है. किन्नर ममता पिछले तीन साल से नगरपालिका की अध्यक्ष हैं.

रावतभाटा नगर पालिका प्रमुख ममता ने सरकार के फैसले का स्वागत तो किया, साथ ही उनका कहना था कि पेंशन की राशि बहुत कम है.

किन्नर शादी समारोह और जन्म उत्सव पर नाच गा कर नजराने से गुजर बसर करते है.

अच्छा होता सरकार इसे कम से कम एक हजार रुपए महीना तय करती. उनके अनुसार, ''मैं इतना जरूर कहूँगी, अब तक किसी सरकार ने हमें पूछा तक नहीं. इस सरकार ने कम से कम हमारी सुध तो ली. अभी पांच सौ रुपए से शुरुआत हुई है, आगे ये रकम बढ़ सकती है.''

अपमानजनक

ममता कहती है उन्हें जगह जगह ताने सुनने पड़ते हैं. लोग किन्नरों का उल्लेख बहुत अपमानजनक ढंग से करते हैं. नगरपालिका अध्यक्ष ममता कहती हैं वो बहुत ही कामयाबी से अपने फर्ज़ का निर्वाह कर रही हैं.

हालाँकि राजस्थान में कांग्रेस और बीजेपी का दबदबा है मगर ममता इन दोनों के बीच रास्ता बना कर तीसरी शक्ति के रूप में प्रकट हुई और निर्दलीय के रूप में अध्यक्ष निर्वाचित हुईं. अब वो विधायक का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही हैं.

वे कहती हैं, ''मै जीतूंगी और सदन में अपनी बात रखूंगी.''

किन्नरों की हालत सुधारने के लिए आवाज उठाते रहे सामाजिक कार्यकर्ता हेमंत गोयल कहते हैं किन्नरों के लिए सरकार को और भी बहुत कुछ करना चाहिए. इनके लिए अलग से स्कूल भी होना चाहिए.

कभी बुलाए और कभी बिन बुलाए मेहमान के बतौर वो शादी और जन्मोत्सव पर अपनी आमद दर्ज कराते थे फिर उन्हें कोई नजराना मिलता था. अब उत्सव और नाच गानों में ताली बजाते बजाते खुरदरी हो चुकी उनकी हथेलियो में पेंशन की राशि आएगी. यह राशि छोटी तो होगी लेकिन इससे उन्हें सुकून होगा यह राशि उन्हें बा हक मिलेगी.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार