सब इंस्पेक्टर जिसने नहीं ली 14 साल से छुट्टी

  • 3 दिसंबर 2012
Image caption संसद मार्ग में अपनी ड्यूटी पर बलजीत संह राणा

सप्ताह भर बिना छुट्टी के काम करने के बारे में आपकी क्या राय हो सकती है और अगर बॉस आपको महीने भर लगातार दफ्तर आने को कहे तो उस बॉस के लिए आपकी प्रतिक्रिया क्या हो सकती है?

बहुत संभव है कि सप्ताह भर आप किसी तरह से काम कर भी लें, क्योंकि मामला नौकरी का है.

लेकिन, अगर ये मामला सप्ताह से बढ़ कर महीने और फिर साल को पार करने लगे तो फिर नौकरी को तिलांजलि देना ही शेष उपाय हो सकता है.

लेकिन दिल्ली पुलिस में एक सब इंस्पेक्टर ऐसे हैं जिन्होंने पिछले 14 सालों से कोई छुट्टी नहीं ली है. एक भी साप्ताहिक छुट्टी (वीकली ऑफ) तक नहीं.

नौकरी और परिवार

बलजीत सिंह राणा पिछले 40 वर्षों से दिल्ली पुलिस में कार्यरत हैं और पिछले 14 साल से वो बिना छुट्टी के लगातार दफ्तर आ रहे हैं.

Image caption अपने परिवार के साथ बलजीत सिंह. उनके परिवार में दो बेटियां और एक बेटा है

इस बीच उनकी बेटियों की शादियां भी हुईं लेकिन बलजीत सिंह ने ड्यूटी कभी नहीं छोड़ी.

उनकी दो बेटियां और एक बेटा है. तीनों की शादी हो चुकी है और उनका एक खुशहाल परिवार है.

उनका बेटा हांगकांग में एक बैंक मे नौकरी करता है जबकि दो बेटियां भी नौकरी पेशा हैं.

बलजीत अपनी ड्यूटी को लेकर जितने पक्के हैं उतने ही परिवार को लेकर संजीदा भी.

बलजीत की पत्नी सुशीला कहती हैं, “ऐसा कभी नहीं हुआ कि घर के काम को या हमारी जरूरत को उन्होंने नजरअंदाज किया हो, लेकिन शुरुआती दौर में इनका छुट्टी ना लेना अखरता था."

"हमें लगता था कि सबको छुट्टी मिलती है, बस इन्हें नहीं मिलती. लेकिन बाद में हमें लगा कि इनकी अपनी एक जीवनशैली है और उन्होंने कभी परिवार को अकेला नहीं छोड़ा. काम के समय पर वो हाजिर होते रहे. सामंजस्य बन गया."

कभी बीमार नहीं पड़े

बलजीत को कभी मेडिकल छुट्टी की जरूरत भी नहीं पड़ी क्योंकि वो बीमार नहीं पड़ते.

वो नियमित रूप से योग और प्रणायाम करते हैं और शाकाहारी खाना खाते हैं.

विशिष्ट सेवा के लिए उन्हें दो बार राष्ट्रपति मेडल मिल चुका है. बलजीत 60 साल के हैं लेकिन उनके जज्बे में कोई कमी नहीं है.

आजकल वो दिल्ली के संसद मार्ग थाने में डिप्लॉमेंट सेल में बतौर कंसलटेंट तैनात हैं और ये अतिरिक्त कार्यभार उन्हें 31 अगस्त को सेवानिवृत होने के बाद मिला है.

वो कहते हैं कि उन्हें कभी लगा ही नहीं कि वो थक गए हैं और उन्हें छुट्टी की जरूरत है तो फिर छुट्टी क्यों लें.

एक मिसाल

संसद मार्ग यानी दिल्ली का वो इलाका जिसे सुरक्षा के लिहाज से तो अहम माना ही जाता है, सबसे अधिक धरने भी यहीं होते हैं और ये वीआईपी (अति विशिष्ट) रूट भी है.

ऊपर से सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जिम्मेदारी, लेकिन बलजीत को देखकर लगता नहीं कि वो थक गए हैं. उनको देखकर तो यही लगता है कि उन्हें काम करने में बहुत आनंद आता है.

दिल्ली पुलिस को भी उन पर गर्व है. एडिशनल डीसीपी और बलजीत के वरिष्ठ अधिकारी मंगेश कश्यप कहते हैं, “अपनी छुट्टी तो लेनी ही चाहिए, खासतौर से पुलिस वाले को क्योंकि उनकी नौकरी आसान नहीं होती. लेकिन बलजीत ने 14 सालों से कोई छुट्टी नहीं ली, इनके जाने के बाद विभाग को इन जैसा मिलना मुश्किल है.”

दिल्ली पुलिस के लिए बलजीत एक मिसाल भी हैं और प्रेरणा भी लेकिन एक छोटी सी कसक भी तकरीबन बड़े अधिकारी से लेकर छोटे सिपाही तक है कि आखिर चाह कर भी क्या बलजीत जैसा बना जा सकता है.

संबंधित समाचार