'मैं दिलीप साहब से कोसों पीछे हूं'

  • 30 अगस्त 2013
अमिताभ बच्चन

लावारिस, कुली, नसीब, मर्द, शहंशाह जैसी अमिताभ बच्चन की वो तमाम फ़िल्में हैं जिन्होंने बॉक्स ऑफ़िस पर ज़बरदस्त कारोबार तो किया लेकिन फ़िल्म समीक्षकों की आलोचनाएं भी झेलीं.

कहा गया कि अमिताभ इतने बड़े स्टार होने के बावजूद एक जैसे विषयों पर एक ही तरह की मसाला फ़िल्में करते गए जिनमें मारपीट के अलावा कुछ नहीं होता था. लेकिन अमिताभ बच्चन पुरज़ोर तरीके से अपनी इन फ़िल्मों का बचाव करते हैं.

बीबीसी से ख़ास बातचीत करते हुए अमिताभ कहते हैं, "ये कहना कि इन फ़िल्मों में कोई तत्व नहीं होता था ये ग़लत बात है. इन फ़िल्मों में अच्छाई की जीत और बुराई की हार दिखाई जाती थी. और ये वो फ़िल्में हैं जिनमें ढाई घंटे में जनता पोएटिक जस्टिस होते हुए देखती थी और संतुष्ट होकर घर लौटती थी. वर्ना तो भाई साहब, हमको और आपको असल ज़िंदगी में ताउम्र पोएटिक जस्टिस नहीं मिलता."

अमिताभ ने इस बात को भी नकारा कि उन्होंने एक ख़ास किस्म की ही फ़िल्में कीं.

वो कहते हैं, "अगर आप प्रकाश मेहरा और मनमोहन देसाई की फ़िल्मों की बात करते हैं तो मेरी उन फ़िल्मों की भी बात आपको करनी पड़ेंगी जो ऋषिकेश मुखर्जी और ख़्वाजा अहमद अब्बास ने बनाईं."

दिलीप कुमार से कोसों पीछे

हाल ही में कई फ़िल्मों में अमिताभ बच्चन के सह अभिनेता रहे कादर ख़ान ने कहा था कि अभिनय के मामले में अमिताभ बच्चन, दिलीप कुमार से बस ज़रा सा पीछे रह गए.

इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अमिताभ ने कहा, "कादर ख़ान की ये धारणा ग़लत है. मैं दिलीप साहब से ज़रा सा नहीं बल्कि कोसों पीछे हूं. वो मेरे आदर्श रहे हैं और मुझे नहीं लगता कि मैं उनके करीब पहुंच पाऊंगा."

'प्रबुद्ध बच्चन चाहिए'

इस इंटरव्यू के दौरान अमिताभ बच्चन के साथ मौजूद थे निर्देशक प्रकाश झा, जिनकी फ़िल्म 'सत्याग्रह' शुक्रवार को रिलीज़ हो रही है, जिसमें अमिताभ बच्चन की भी मुख्य भूमिका है.

प्रकाश झा ने 80 के दशक में अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत की थी. लेकिन अमिताभ के साथ पहली बार उन्होंने 'आरक्षण' फ़िल्म बनाई जो साल 2011 में रिलीज़ हुई.

भला इतना लंबा इंतज़ार क्यों ?

प्रकाश झा बोले, "भई, भगवान इतने लंबे समय बाद मुझ पर प्रसन्न हुए, तो यही सही. वैसे मैं अपनी फ़िल्म 'मृत्युदंड' के वक़्त से ही बच्चन जी के साथ काम करना चाह रहा था. लेकिन चलिए. देर आए, दुरुस्त आए."

क्या कभी तमन्ना नहीं हुई कि उस दौर में अमिताभ को लेकर फ़िल्म बनाते जब वो जवान थे ताकि रोल के साथ और ज़्यादा प्रयोग किए जा सकते.

इसके जवाब में प्रकाश झा बोले, "मेरी कहानी में मुझे प्रबुद्ध और मैच्योर बच्चन ही चाहिए थे. तो भला मैं क्यों जवानी की फिक्र करूं."

तब अमिताभ ने बीच में टोकते हुए प्रकाश झा से कहा, "भाई साहब. अगर आप ये कह देते कि मैं अब भी जवान हूं तो आपका क्या बिगड़ जाता."

ये कहकर उन्होंने अपनी चिर परिचित शैली में ठहाका लगाया. जिस पर प्रकाश झा ने उनका भरपूर साथ दिया और दोनों माइक पर साथ में बोले, "बुड्ढा होगा तेरा बाप".

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