बॉक्स ऑफ़िस पर बल्ले बल्ले

  • 18 मई 2013
रंगीले

पंजाबी फ़िल्म: कैरी ऑन जट्टा. बजट: 3.5 करोड़. बॉक्स ऑफिस पर कमाई (फ़िल्म व्यापार विशेषज्ञों के मुताबिक़): लगभग 18 करोड़ का दावा.

फ़िल्म: जट्ट एंड जूलियट. बजट: 4.5 करोड़ रुपए. बॉक्स ऑफिस कमाई: लगभग 20 करोड़ रुपए.

फ़िल्म: लकी दी अनलकी. बजट: 4.5 करोड़ रुपए. पहले सप्ताह की कमाई: 5.5 करोड़ रुपए.

जिमी शेरगिल की पंजाबी फिल्म 'रंगीले' शुक्रवार को रिलीज़ हुई. इसमें इरॉस जैसे बड़े प्रोडक्शन हाउस ने पैसा लगाया है.

ऊपर लिखी हुई पंजाबी फ़िल्मों की कमाई इनके निर्माताओं के लिए बेहद उत्साहवर्धक है.

कभी साल में 2-3 फ़िल्में बनाने वाली पंजाबी फ़िल्म फैक्ट्री आज साल में 100 से ज़्यादा फ़िल्में बना रही है. ज़ाहिर है निर्माताओं को पंजाबी फ़िल्मों में पैसा नज़र आने लगा है.

दिन बदले

अभिनेता जिमी शेरगिल पंजाबी फ़िल्मों का जाना-माना चेहरा बन चुके हैं. उनकी पंजाबी फ़िल्म 'रंगीले' इसी सप्ताह रिलीज़ हुई.

बीबीसी से ख़ास बात करते हुए जिमी कहते हैं, "मैंने वो दौर भी देखा है जब पंजाबी फ़िल्मों के निर्माता रोते थे और आज ये दौर है कि 'साड्डा हक़' जैसी बेहद कम बजट में बनी फ़िल्म ने ओवरसीज़ में सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए. आज हर कोई पंजाबी फ़िल्में बनाना चाहता है. अक्षय कुमार जैसे बड़े सितारे पंजाबी फ़िल्मों में पैसा लगा रहे हैं."

आलम ये है कि इरॉस जैसे बड़े प्रोडक्शन हाउस ने जिमी शेरगिल के साथ तीन पंजाबी फ़िल्में बनाने का कॉन्ट्रैक्ट किया. ज़ाहिर है कॉर्पोरेट हाउस को भी पंजाबी सिनेमा में पैसे लगाना फ़ायदे का सौदा लगने लगा है.

बाहर भी हिट

जिमी शेरगिल दावा करते हैं कि पंजाबी फ़िल्में पंजाब से बाहर निकल रही हैं और दिल्ली, मुंबई के साथ-साथ ओवरसीज़ में भी तगड़ी कमाई कर रही हैं.

वो कहते हैं, "आप मेरी बात ग़ौर से सुनिए. जल्द ही पंजाबी फ़िल्में दिल्ली जैसे शहर में बड़ी-बड़ी हिंदी फ़िल्मों के बराबर की कमाई करेंगी."

'कैरी ऑन जट्टा' के निर्देशक स्मीप कांग ने बीबीसी को बताया कि साल 2008 में उन्होंने अपनी पहली पंजाबी फ़िल्म 'चक दे फट्टे' बनाई. फ़िल्म सिर्फ डेढ़ करोड़ में बनी फिर भी ये बॉक्स ऑफिस पर पैसा वसूल नहीं कर पाई. इससे वो बड़े निराश हुए.

लेकिन 'कैरी ऑन जट्टा' और 'जट्ट एंड जूलियट' ने उनके सारे 'ज़ख़्मों' पर मरहम लगा दिया.

कैरी ऑन जट्टा जैसी पंजाबी फिल्म का बजट 3.5 करोड़ रुपए थे और इसने बॉक्स ऑफिस पर कुल 18 करोड़ रुपए कमाए.

वो कहते हैं, "पहले हिंदी और पंजाबी फ़िल्मों का दर्शक वर्ग एक ही होता था. इसलिए हिंदी फ़िल्मों के मुक़ाबले पंजाबी फ़िल्में ठहर ही नहीं पाती थीं. लेकिन बीते कुछ समय में पंजाबी फ़िल्मों का अलग दर्शक वर्ग तैयार हो रहा है. इसलिए निर्माता अब इनमें पैसे लगाने से हिचक नहीं रहे हैं."

स्मीप के मुताबिक ओवरसीज़ में सिर्फ बड़ी हिंदी फ़िल्में ही अच्छा व्यापार करती हैं. जो बी ग्रेड हिंदी फ़िल्में हैं उनसे कहीं बहुत ज़्यादा व्यापार ए ग्रेड पंजाबी फ़िल्में कर रही हैं. स्मीप फिलहाल अक्षय कुमार निर्मित एक पंजाबी फ़िल्म का निर्देशन कर रहे हैं.

बेहतर प्रोडक्शन

जानकारों का मानना है कि पंजाबी फ़िल्मों की प्रोडक्शन क्वालिटी भी पहले से ख़ासी बेहतर हो गई है. और लोगों को अच्छा सिनेमा देखने को मिल रहा है इसलिए वो बड़ी तादाद में पंजाबी फ़िल्में देखने जा रहे हैं.

इरॉस और वायकॉम जैसे बड़े प्रोडक्शन हाउस के आने से पंजाबी सिनेमा समृद्ध हो रहा है.

फ़िल्म व्यापार विशेषज्ञ कोमल नाहटा के मुताबिक़ पंजाबी समुदाय बड़ी संख्या में पंजाब के अलावा दिल्ली, उत्तर भारत, मुंबई और विदेश में अमरीका, कनाडा में रहता है.

जिस वजह से अच्छे प्रोडक्शन क्वालिटी वाली पंजाबी फ़िल्मों का धंधा बढ़ने की गुंजाइश बन गई है और पंजाबी सिनेमा का भविष्य उज्जवल नज़र आने लगा है.

दिल्ली दूर है

लेकिन सब कुछ अच्छा हो ऐसा भी नहीं माना जा सकता. जिमी शेरगिल कहते हैं, "अभी भी पंजाबी सिनेमा को लंबा रास्ता तय करना है. फ़िल्में पैसे कमा ज़रूर रही हैं लेकिन छप्पर फाड़ पैसा अभी नहीं बरस रहा है."

जानकार मानते हैं कि बड़े कॉर्पोरेट हाउस के आने से पंजाबी फिल्मों की गुणवत्ता बढ़ रही है.

"जब ये फ़िल्में बहुत पैसा कमाने लगेंगी तब बड़े कॉर्पोरेट हाउस मसाला फ़िल्में बनाने के साथ-साथ कुछ अच्छी, अर्थपूर्ण और गंभीर फ़िल्में बनाने का साहस भी कर पाएंगे. इससे पंजाबी सिनेमा का विकास होगा."

भेड़चाल

स्मीप कांग भी ऐसा ही मानते हैं. वो कहते हैं, "पंजाबी फ़िल्मों में लोगों को पैसा नज़र आने लगा है तो हर कोई इस भेड़चाल में जुट गया है. कई दूसरे धंधे करने वाले मसलन रियल एस्टेट का बिज़नेस करने वाले भी इसमें आ गए हैं."

"वो सोचते हैं कि चलो हमारा धंधा मंदा चल रहा है तो फ़िल्में ही बना लें. उसमें पैसे कमा लेंगे. ऐसे लोग पंजाबी सिनेमा को नुकसान ही पहुंचाएंगे."

स्मीप के मुताबिक़ जो लोग सीरियस फ़िल्ममेकर नहीं हैं वो भी फ़िल्में बनाने लगेंगे तो फ़िल्मों की गुणवत्ता प्रभावित होगी. बड़ी संख्या में फ़िल्में बनने लगेंगी जो एक दूसरे के व्यापार को नुकसान पहुंचाएंगी.

जानकार मानते हैं कि पंजाबी सिनेमा और आगे बढ़े इसके लिए ज़रूरी है कि भले ही कम फ़िल्में बनें लेकिन अच्छे स्तर की, अच्छे प्रोडक्शन वैल्यूज़ वाली फ़िल्में बनें.

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