एड्स: बच सकते हैं रोगी के पार्टनर

 शनिवार, 1 दिसंबर, 2012 को 17:10 IST तक के समाचार

ये रिपोर्ट विश्व एड्स दिवस(29 नवम्बर) के मौके पर इस रिपोर्ट को पेश किया गया

चीन में शोधकर्ताओं ने पाया है कि जो एचआईवी पीड़ित इलाज करवा रहे हैं, उनके जीवसाथी (जो एचआईवी संक्रमित ना हो) में एचआईवी फैलने का खतरा कम हो जाता है.

क्लिनिकल ट्रॉयल के नतीजों में एंटी रेट्रो वायरल (एआरवी) इलाज के फायदे भी दिखाई दिए हैं.

इस ट्रायल के बारे में लांसेट रिपोर्ट में कहा गया है कि ये अपनी तरह की इकलौती असल ज़िंदगी से जुड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य परियोजना है.

ब्रिटेन में एचआईवी विशेषज्ञों का कहना है कि इस बात पर सर्वसम्मति बनती जा रही है कि एचआईवी पीड़ितों तक एआरवी इलाज़ उपलब्ध करवाने से एड्स की संक्रमण दर को कम किया जा सकता है.

"अब चुनौती ये सुनिश्चित करने की है कि वैश्विक स्तर पर जो प्रगति हुई है उसे हर स्तर पर दोहराया जाए, ताकि एचआईवी पीड़ित लोग कहीं के भी हो, किसी भी वर्ग के हो, इस दवा को हासिल कर सकें."

डॉ. गॉटफ्राइड हर्नशेल, निर्देशक, एड्स विभाग विश्व स्वास्थ्य संगठन

क्लिक करें विश्व एड्स दिवस (एक दिसंबर) के मौके पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक बयान जारी किया जिसमें वैश्विक स्तर पर संक्रमण रोकने के मामलों की प्रगति और एड्स संबधी मौतों का ब्यौरा है.

क्या कहते हैं दुनिया के आंकडे

एड्स का दायरा

  • नए संक्रमण

2001 में- 32 लाख

2011 में- 25 लाख

  • एड्स संबधी मौत

2005 में- 23 लाख

2011 में- 17 लाख

  • एआरवी इलाज का दायरा

2003 में- 4 लाख

2011 में-80 लाख

2015में- 150 लाख (निर्धारित लक्ष्य)

नए संक्रमण के आंकड़ों के अनुसार 2011 में 25 लाख नए संक्रमण हुए जो कि 2001 में हुए नए संक्रमणों से सात लाख कम हैं. 2011 के दौरान 17 लाख लोगों की एड्स संबधी बीमारियों से मौत हुई जोकि 2005 के मुकाबले छह लाख कम हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि एआरवी दवाईयों की उपलब्धता इन आंकड़ों को कम करने में महत्वपूर्ण हो सकती है.

ये दवाई खून में मौजूद वायरस की मात्रा को घटा देती है और इससे संक्रमित इंसान से इसके फैलने का खतरा भी कम हो जाता है.

पिछले वर्ष संयुक्त राष्ट्र महासभा में देशों ने 2015 तक डेढ़ करोड़ एचआईवी संक्रमित लोगों तक इस दवाई को पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था. विश्व स्वास्थय संगठन का मानना है कि ये लक्ष्य हासिल किया जा सकता है, बशर्ते सरकारें मौजूदा दर को बरकरार रख सके.

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट में कहा गया है कि निम्न आय वर्ग और मध्यम आय वर्ग के 80 लाख लोग इस इलाज़ को हासिल कर रहे हैं जबकि 2003 में सिर्फ 4 लाख लोग ही इस इलाज के दायरे में थे.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के एड्स विभाग के निर्देशक डॉ. गॉटफ्राइड हर्नशेल कहते हैं, “अब चुनौती ये सुनिश्चित करने की है कि वैश्विक स्तर पर जो प्रगति हुई है उसे हर स्तर पर दोहराया जाए, ताकि एचआईवी पीड़ित लोग कहीं के भी हो, किसी भी वर्ग के हो, इस दवा को हासिल कर सकें.”

क्या है चीन के शोध में

चीन में हुए शोध में दंपत्तियों का नौ साल तक अध्यन किया गया, ये इस तरह की पहली परियोजना थी. 24000 जोड़ों पर किए गए शोध में एचआईवी पीड़ितों का एआरवी इलाज़ शुरु किया गया था जबकि 14800 का एआरवी इलाज शुरु नहीं किया गया था.

14800 लोगों को एआरवी इलाज इसलिए नहीं दिया जा सका था क्योंकि वो एआरवी इलाज के लिए निर्धारित राष्ट्रीय दिशानिर्देशों पर खरे नहीं उतरते थे.

जिनका इलाज किया गया था उस दल में संक्रमण दर बिना इलाज किए गए दल से 26 प्रतिशत कम थी.

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